जिला शिक्षा अधिकारी का तुगलकी फरमान, पीएम की जनसभा के लिए स्कूलों की छुट्टी

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देहरादून/उधमसिंहनगर। शायद आपने ऐसा पहले कहीं नहीं देखा होगा और सुना होगा कि किसी नेता की जनसभा के कारण किसी जनपद के सभी स्कूल कालेज और शिक्षण संस्थानों की छुट्टी घोषित कर दी जाये। उधमसिंह नगर इसका एक उदाहरण है जहंा 14 फरवरी (कल) रूद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक जनसभा होने वाली है। पीएम की इस जनसभा के मद्देनजर ही शिक्षा अधिकारी द्वारा जनपद के सभी स्कूल कालेज व शिक्षण संस्थानों में छुट्टी रखने का फरमान अधीनस्थ अधिकारियों को जारी किया है। हास्यापद बात यह है कि पीएम की जनसभा रूद्रपुर में होनी है लेकिन जनपद उधमसिंहनगर के सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थाओं को बंद कराने का फरमान जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। उससे भी हैरानी वाली बात यह है कि इस निर्णय के पीछे जो कारण पत्र में लिखा गया है कि जिससे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। स्कूलों के खुले रहने से क्या अप्रिय घटना घटित हो सकती है यह बात सिर्फ शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार ही जान समझ सकते है।
जानकारी के अनुसार पीएम मोदी आज उत्तराखण्ड पहुंचने वाले है। बताया जा रहा है कि आज रात्री वह जिम कार्बेट पार्क में रात्री विश्राम करेगें। और कल 14 फरवरी को सुबह पहले पार्क की सैर करेंगे और इसके बाद रूद्रपुर मेें जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा जिसने वर्तमान दौर की राजनीति के तौर तरीके व चलन को बदल डाला अब किसी भी बड़े नेता के आगमन पर पहले भूमि पूजन की नई परम्परा शुरू कर चुकी है जैसा की अभी अमित शाह के दून दौरे के दौरान परेड ग्रांडड में देखने को मिला था। बीते कल पीएम के दौरेे के लिए सीएम त्रिवेन्द्र व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कल रूद्रपुर में भूमि पूजन का टोटका किया। बाकी सब ठीक है भाजपा की अपनी कार्यश्ौली है वह किसी भी काम को किसी भी तरह से करे लेकिन बच्चों की पढ़ाई को अनावश्यक रूप से रोका जाना क्या औचित्यहीन नहीं है। पीएम की सुरक्षा को लेकर या किसी भी अनहोनी की आंशका को लेकर स्कूलों के खुले रहने से कोई खतरा था तो यह भी समझ आता था कि सिर्फ रूद्रपुर के स्कूल व शिक्षण संस्थान बंद रखे जाते लेकिन पूरे जनपद उधमसिंह नगर में स्कूल कालेजों की छुट्टी घोषित किया जाना बच्चों की शिक्षा व हितों केे साथ खिलवाड़ ही है। किसी वीआईपी मूवमेंट के दौरान रूट डायवर्ट या सुरक्षा की व्यवस्था को चाक चौबन्द तो बनाया जाना आम बात है लेकिन स्कूलों व शिक्षण संस्थानों की छु्ट्टी पहली बार देखी जा रही है। सत्तारूढ़ भाजपा और ब्यूरोक्रेट ऐसा करके जनता को क्या संदेश देना चाहते है किसी की भी समझ से परे है लेकिन जिसकी लाठी उसकी भ्ौंस। सत्ता भाजपा की इसलिए वह जो करे या करवाये वही सही बाकी सब गलत है।

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