कच्ची शराब पीकर मरो, मुआवजा लो

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देहरादून। जहरीली शराब से हुई सूबे में तीन दर्जन लोगों की मौत पर अब सत्ता में बैठे नेता और आला अफसर लीपा पोती करने में जुटे है। पीड़ितों को मुआवजा देकर चुपचाप घर बैठने पर विवश किया जा रहा है वहीं निचले स्तर के कर्मचारियों का निलम्बन कर बड़े अफसरों को बचाने का प्रयास हो रहा है। यही नहीं मामले की जांच के लिए एक के बाद एक कमेटी गठित कर यह दिखाने का प्रयास भी किया जा रहा है कि शासन—प्रशासन इस घटना को लेकर अत्यन्त ही गम्भीर है।
सवाल यह है कि सरकार द्वारा इस गम्भीर मामले में अब तक हरिद्वार के डीएम, एसएसपी और जिला आबकारी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी है जिनकी जिम्मेवारी क्षेत्र के कानून व्यवस्था की है। क्या हरिद्वार के आला अफसरों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार चल रहा है उनके द्वारा इसे रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं किया गया। हरिद्वार के डीएम जो हर की पैड़ी पर शराब का पव्वा तो पकड़ लेते है लेकिन उन्हे क्षेत्र में कच्ची शराब की यह भट्टियंा नजर क्यों नहीं आती है हैरान करने वाली बात है। आबकारी निरीक्षकों, दरोगाओं व सिपाही जिन्हे निलम्बित किया गया से इस समस्या का क्या समाधान होगा। यह कार्यवाही क्या लोगों का गुस्सा कम करने के लिए की गयी, कार्यवाही नहीं है। सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को दो—दो लाख रूपये का मुआवजा दिये जाने का क्या औचित्य है। क्या सरकार यह चाहती है कि वह गरीब परिवार जो 25—25 रूपये की कच्ची शराब की थ्ौली पीकर मरे है उनके परिवार वाले भी उसी रास्ते पर चले। इन गरीब परिवारों में से अधिकांश ऐसे है जिन्होने दो लाख की रकम एक साथ कभी नहीं देखी होगी। सत्ता मेें बैठे लोगों की सोच है कि पैसा दे दिये जाने से वह चुप होकर बैठ जायेगें। एक सवाल यह भी है कि उन्हे किसने कहा था जहर पीने के लिए। क्या सरकार गलती करने वालों को मुआवजा देकर फिर अगली गलती करने के लिए उन्हे प्रोत्साहित नहीं कर रही है?
अभी बीते दिनों हल्द्वानी के एक व्यवसायी ने व्यापार में घाटा होने पर सरकार से आर्थिक मदद मांगी थी और न मिलने पर भाजपा मुख्यालय में जहर का सेवन कर जान दे दी थी। लेकिन सरकार मुआवजे की घोषणा के बाद भी मुकर गयी। वहीं सूबे में अब तक जिन किसानों द्वारा आर्थिक तंगी और बैंक कर्ज न चुका पाने के कारण आत्महत्याये ंकर ली गयी थी उनमें से किसी एक को फूटी कौड़ी मुआवजा नहीं दिया गया। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह का कहना है कि अगर उन्हे मुआवजा देगें तो इससे आत्महत्याओं को प्रोत्साहन मिलेगा। क्या जहरीली शराब पीकर मरने वालों को मुआवजा दिया जाना उनके परिजनों को शराब पीने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेगा। सरकार को चाहिए कि वह समस्या की जड़ पर प्रहार करे उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करे जो इस घटना के लिए जिम्मेदार है।

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