विधायक अपमान की घटना प्रायोजितः प्रीतम

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देहरादून। विधायक प्रीतम सिंह का कहना है कि भाजपा सरकार द्वारा आज जो विधायक करन मेहरा के अपमान की घटना सामने आयी है वह सरकार का एक प्रायोजित षडयंत्र है। सरकार को पता था कि आज सदन में विपक्ष द्वारा लोकायुक्त और एनआईटी तथा गैरसैंण पर कुछ ऐेसे सवाल उठाये जाने है जिनका जवाब सरकार के पास नहीं है उनका कहना है कि सरकार ने इन सवालों के जवाबों से बचने के लिए सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेसी विधायको का अपमान कराया गया। जिससे सदन की कार्यवाही न चल सके।
नेता प्रतिपक्ष इंिदरा हृदयेश का कहना है कि यह किसी एक विधायक के अपमान की बात नहीं बल्कि सभी विधायकों के सम्मान का सवाल है। जिन पुलिस कर्मियों द्वारा विधायक के साथ अभद्रता की गयी सरकार उनके खिलाफ तुरन्त कार्यवाही करने से क्यों बच रही है? उन्होने कहा कि आज वह सदन में अति महत्वपूर्ण व भ्रष्टाचार से जुड़े लोकायुक्त के मुद्दे पर सवाल पूछना चाहती थी। उन्होने कहा कि एनआईटी श्रीनगर की साख को बट्टा लग रहा है वहंा के छात्रों को जयपुर शिफ्ट क्यों किया जा रहा है? और सरकार हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है? उन्होने कहा कि पहले ही सरकार ने शीतकालीन इस सत्र की अवधि सिर्फ तीन दिन रखी थी जिस पर उन्होने आपत्ति जताई थी। सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देना चाहती वह सिर्फ अनुपूरक बजट और कुछ जरूरी काम काज निपटाना चाहती है इसलिए सत्र बुलाया गया है। उन्होने कहा कि सरकार अभद्रता करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करे हम सदन में जाने को तैयार है। इस अवसर पर धामी ने कहा कि कांग्रेस इस तरह का अपमान कतई बर्दाश्त नहंी करेगी। यह आंदोलन कब तक चलेगा इसके जवाब में कांग्रेसी विधायको का साफ कहना है कि अनिश्चित काल तक। जब तक की दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती है। कांग्रेसी विधायको का कहना है कि वह अपना अपमान कराने के लिए यहंा चुनकर नहीं आये है। इस दौरान कांग्रेस विधायकों और नेताओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

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