रैली में खूब उड़ी नियमाेंं की धज्जियंा

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देहरादून। 18 नवम्बर को होने वाले निकाय चुनाव का प्रचार अभियान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। कल शाम पंाच बजे प्रचार का शोरगुल थम जायेगा। बाकी बचे कुछ घंटों में प्रत्याशी अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिशों में जुटे है। लेकिन इन कोशिशों के बीच चुनाव प्रचार में कानून व्यवस्था की जमकर धज्जियंा उड़ाई जा रही है। स्थिति इतनी खराब है कि पुलिस प्रशासन भी नियम कानूनों का अनुपालन कराने में नाकाम नजर आ रहा है।
ट्टजिसकी लाठी उसकी भ्ौंस, की कहावत आज दून की सड़कों पर भाजपा की दो पहिया वाहन रैली के दौरान चरितार्थ होती दिखी। राजधानी की सड़कों पर बिना हैलमेट के एक एक दुपहिया वाहन पर तीन तीन सवारियंा लेकिन रोकने टोकने वाला कोई नही। रोके भी तो कोई कैसे रैली सत्तारूढ़ भाजपा की जो थी। जिसकी अगुवाई महापौर पद के प्रत्याशी सुनील गामा और अन्य कई बड़े भाजपा नेता कर रहे थे। दपहिया वाहनों पर सवार युवाओं का हुड़दंगी रैला जिधर से भी गुजरा सहमें हुए लोगों ने भी रास्ता छोड़ देना बेहतर समझा। इस रैली के लिए राजधानी के सभी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा जुटे थे। पूरे शहर में भाजपा प्रत्याशियों को शक्ति प्रदर्शन जो करना था। भले ही निर्वाचन आयोग और जिला पुलिस प्रशासन द्वारा किसी भी तरह के दावे किये जाये या उसने कुछ भी दिशा निर्देश दिये थे लेकिन धरातल पर यह कानून व्यवस्था पूरी तरह से गायब दिखी।
चुनाव प्रचार में दून की सड़कों पर उतरने वाले वाहन चालकों पर यातायात पुलिस व सीपीयू का भी कोई नियंत्रण नहीं है। खास बात यह है कि नियम कानून की धज्जियंा उड़ाने वाले लोगों को रोक पाना तो दूर उन्हे रोक कर यह कहने का भी साहस वर्दीधारियों में नहीं दिखा कि वह यह क्या कर रहे है। जो पुलिस व सीपीयू आम आदमी को सड़कों व गलियों तक में दौड़ दौड़ कर पकड़ते है और उनका चालान करते है, भाजपा की दो पहिया रैलियों के दौरान वह भी नजर नहीं आये। खास बात यह है कि सत्ताधारी दल के नेताओं ने भी अपने कार्यकर्ताओं को नियमों की धज्जियंा उड़ाने से रोकने का प्रयास नहीं किया।

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