ओला कैब का संचालन बंद करना तुगलकी निर्णय

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देहरादून। सूबे में ओला कैब का संचालन बंद किये जाने से आम आदमी नाराज है। लोग ओला कैब के संचालन पर रोक लगाने के निर्णय को परिवहन विभाग का तुगलकी निर्णय बता रहे है। उनका कहना है कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए राज्य में जो एक सस्ता और सुलभ साधन था उसे परिवहन विभाग द्वारा प्राईवेट टैक्सी—मैक्सी यूनियनों के दबाव में बंद किया गया है तथा उन्हे फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है।
उल्लेखनीय है कि अपर परिवहन आयुक्त सुनीता द्वारा राज्य के सभी आरटीओ, एआरटीओ को आदेश दिये गये है कि राज्य में पौड़ी, दून, अल्मोड़ा व हरिद्वार तथा हल्द्वानी आदि शहरों में चल रही ओला कैब के संचालन पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाये। परिवहन विभाग का कहना भले ही यह है की ओला कैब का संचालन अवैध रूप से हो रहा है। कैब संचालन की शर्तो को पूरा करने का किसी ने भी आवेदन नहीं किया है लेकिन सच यह है कि ओला कैब के संचालन से आम आदमी को सस्ती दर पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की सुविधा मिल रही है तथा टैक्सी व आटो चालकों की मनमानी वसूली का धंधा प्रभावित हो रहा था जिसके कारण टैक्सी संचालक और यूनियन ओला कैब को बंद कराने की जुगत में जुटे थे
लोगों का कहना है कि परिवहन निगम द्वारा यह तुगलकी निर्णय टैक्सी संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। कैब की सुविधा लोगों को एक फोन पर उपलब्ध थी तथा उसकी दरें भी कम थी। एक तरफ राज्य सरकार पर्यटन को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की बात कहती है तो वहीं प्राईवेट वाहनों की मनमानी वसूली को बढ़ावा दे रही है। अन्य तमाम राज्यों में भी तो ओला कैब की सेवाएं ली जा रही है तो फिर उत्तराखण्ड को ही उसके संचालन में परेशानी हो रही है? अगर शर्ते पूरी नहीं की गयी तो उसे पूरा भी तो कराया जा सकता था या बंद करना ही जरूरी था।

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