मीटू में फंसी भाजपा की मुश्किलें बढ़ी

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देहरादून। निकाय चुनाव के दौर में सुर्खियों में आया भाजपा मुख्यालय में महिला उत्पीड़न का मामला पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। हालात यह है कि अब पार्टी के नेताओं को इस मुद्दे पर कोई जवाब देते नहीं बन रहा है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मीडिया प्रभारी तक किसी भी सवाल का जवाब सीधे सीधे नहीं दे पा रहे है। और अब केन्द्रीय नेतृत्व के संज्ञान में मामला होने की बात कह कर पल्ला झाड़ रहे है।
आज इस मुद्दे पर जब मीडिया के लोगों ने अजय भट्ट से पूछने की कोशिश की तो अब अपने संज्ञान में न होने की बात करने वाले प्रदेश अध्यक्ष बचते नजर आये उनका कहना है कि अब यही नही चल पा रहा है कि वह महिला कौन है या भाजपा का वह नेता कौन है जिस पर आरोप लगाया जा रहा है। खबरों में संगठन महामंत्री बताया जा रहा है अभी तक किसी ने भी नेता या महिला का नाम नहीं बताया है। निश्चित तौर पर अजय भट्ट का इस तरह अंजान बनने का यह नाटक अत्यन्त ही हास्यापद है। वहीं दूसरी ओर जब कार्यवाही की बात की जाती है तो वह बड़े नेताओं के पाले में गेद डाल देते है। और कहते है कि उनके संज्ञान में है मामले में छानबीन की जा रही है।
संगठन महामंत्री संजय को पद से हटाकर वह एक मुसीबत मोल ले चुी है जबकि उन्हें तो मामला चर्चा में आने से पहले ही हटा दिया गया था। अब जब कांग्रेस इस मामले को लेकर भारी आक्रामक हो चुकी है। ऐसे में अगर विनय गोयल को भी हटाया गया तो निगम चुनाव पर इसका भारी विपरीत प्रभाव पडे़गा। यह भय भी भाजपा को सता रही है। भाजपा की स्थिति इस मामले में आगे कुआं पीछे खाई जैसी है और नेताओं को जवाब देते नहीं बन रहा है।

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