शर्मनाकः संत की मौत पर सियासत

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देहरादून। गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने को लेकर सरकार से विशेष कानून बनाने को लेकर अनशन करने वाले स्वामी सानन्द की मौत पर जिस तरह की सियासत की जा रही है वह निश्चित ही शर्मनाक है। 112 दिन तक अनशन पर बैठे रहे स्वामी सानन्द की सुध भले ही इस दौरान शासन-प्रशासन में सत्ता शीर्ष पर बैठे लोगों ने न ली हो लेकिन अब वह उनकी मौत पर घडियाली आंसू बहाने और एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में जुटे हुए हैं।
स्वामी सानन्द की मौत के बाद ऋषिकेश एम्स के निदेशक डा0 विक्रांत ने यह बयान देकर सबको चौंका दिया है कि स्वामी सानन्द अनशन तोडना चाहते थे लेकिन कुछ लोगों ने दवाब डालकर ऐसा नहीें करने दिया। सवाल यह है कि अपनी मौत से 24 घंटे पहले ठीक ठाक स्थिति में जब स्वामी सानन्द को एम्स लाया जा चुका था तो डाक्टर उन्हें बचा क्यों नहीं सके? दूसरा सवाल यह है कि एम्स के निदेशक ने इस बात का खुलासा उनकी मौत से पहले क्यों नहीं किया? और वह उन लोगों के नाम क्यों नहीं बता रहे हैं जो स्वामी सानन्द पर अनशन जारी रखने के लिए दवाब बनाए हुए थे। उनके इस बयान के पीछे कहीं सत्ता पक्ष की सोची समझी रणनीति तो नहीें है क्योंकि स्वामी सानन्द की मौत से शासन-प्रशासन सवालोें के घेरे में है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि स्वामी सानन्द ने अपनी मौत से एक दिन पहले भी यह बयान दिया था कि वह अपनी मर्जी से अनशन पर बैठे हैं यहीें नहीं उन्होनें खुद को अनशन से जबरन उठाने का विरोध भी किया था।
112 दिन तक अनशन पर रहे सानन्द को बचाने के लिए शासन और प्रशासन ने समय रहते कोई प्रयास क्यों नहीं किया? क्या उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और सरकार को उनके अनशन की जानकारी नहीं थी या फिर हरिद्वार के जिलाधिकारी उनके मरने का इंतजार कर रहे थे। क्या जिला प्रशासन जिसने एक दिन पहले जबरन उन्हें अनशन स्थल से उठाया वह इस काम को पहले नहीं कर सकतेे थे? सवाल बहुत सारे हैं लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है। सत्ता में बैठे लोगों से लेकर गंगा सेवक और पुत्र कहे जाने वाले सभी लोग अब बगले झांकते दिख रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वामी सानन्द की इस मौत के लिए शासन और सिस्टम दोनों जिम्मेवार हैैं। एक संत ने गंगा की रक्षा के लिए 112 दिन के अनशन के बाद दम तोड दिया और नेता अब इस पर घटिया किस्म की राजनीति कर रहे हैं जो अत्यंत शर्मनाक है। हमने न तो निगमानन्द की मौत से कोई सबक लिया और सानन्द की मौत के हमारे लिए कोई मायने नहीं रह गये हैं क्योंकि हमारी संवेदनाएं मर चुकी है।

नहीं कराये जाएंगे अंतिम दर्शन
देहरादून। स्वामी सानन्द के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए नहीं रखा जाएगा क्योंकि उन्होनें अपनी देह ऋषिकेश एम्स को दान कर रखी है। इसकी घोषणा आज एम्स प्रशासन द्वारा की गई। कानून व्यवस्था बिगडने की संभावनाआें को देखते हुए एम्स को छावनी में तब्दील कर दिया गया है क्योंकि मातृ सदन द्वारा उनके पार्थिव शरीर की मांग की जा रही है और उनकी मौत को लेकर साधु संतो में भारी आक्रोश है। समाचार लिखे जाने तक एम्स में स्वामी सानन्द का पोस्टमार्टम चल रहा था। मातृ सदन के संतोें का आरोप है कि स्वामी सानन्द की हत्या एक सुनियोजित षडयंत्र हैै। केंद्र सरकार को इसकी उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए।


हरिद्वार में कैंडल मार्च शाम को
देहरादून। गंगा की रक्षा को लेकर अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वामी सानन्द की मौत को लेकर लोगों में आक्रोश है वहीं नेताओं द्वारा इसे शासन प्रशासन की संवेदनहीनता बताते हुए उन्हें कटघरे में खडा किया जा रहा है। उनकी मौत से क्षुब्ध लोगों द्वारा आज शाम को हरिद्वार में एक कैंडल मार्च का आयोजन किया जाएगा। जिसमें भाग लेने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह व कई अन्य कांग्रेस नेता हरिद्वार रवाना हो चुके हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर कहा है कि हमें उनके अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है। अपुष्ट सूत्रें से यह जानकारी भी मिली है कि इस कैंडल मार्च में राहुल गांधी भी हिस्सा लेने आ सकते हैं।

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