मीटू का दूसरा दौर

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पूर्व मिस इंडिया और बॉलिवुड ऐक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने दस साल पुराने एक मामले में जाने-माने ऐक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीडऩ की शिकायत सार्वजनिक करके देश में ‘प्तमी टूÓ कैंपेन को एक नई गति दी है। इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि वह देश में ‘प्तमी टू इंडियाÓ नाम से नया अभियान शुरू करने की जरूरत महसूस करती हैं। मूल रूप से हॉलिवुड में शुरू हुए प्तमीटू कैंपेन की धमक थोड़े ही दिनों में अन्य देशों की तरह भारत में भी सुनाई देने लगी, लेकिन हॉलिवुड के विपरीत बॉलिवुड में यह कोई ठोस रूप नहीं ले सका।
कई जानी-मानी हस्तियों ने अपने बुरे अनुभवों का जिक्र जरूर किया, पर कहां, कब और कौन जैसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब दिए बगैर। नतीजतन इस अभियान से थोड़ी सनसनी तो फैली, पर एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया जिसमें गलत करने वाले की पहचान सामने आई हो और अदालत से न सही, लोगों की नजरों में भी उसे दंडित होते देखा गया हो। इससे यही जाहिर हुआ कि महिलाओं को खिलौना मानने वाले लोग आज भी मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में बहुत ज्यादा ताकतवर स्थिति में हैं। इनका शिकार हुई महिलाएं मन ही मन घुटती रहने के बावजूद इतनी हिम्मत नहीं कर पा रहीं कि इनका नाम लेकर इन्हें बेनकाब कर सकें।
यह पहला मामला है जिसमें तनुश्री दत्ता ने बाकायदा नाम लेकर एक बड़े अभिनेता को संदेह के दायरे में खड़ा किया है। हालांकि उनकी हिम्मत की कद्र करते हुए भी हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि ऐसे मामलों में सही-गलत का फैसला अदालत में गवाहों और सबूतों की रोशनी में ही हो पाएगा। यह आशंका भी निराधार नहीं है कि कहीं किसी पुरानी खुन्नस के चलते किसी बेकसूर आदमी की जिंदगी न तबाह कर दी जाए। इसलिए अपनी तरफ से कोई भी नतीजा निकाले बगैर फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि मामले से जुड़े सभी संबद्ध तथ्यों की भरोसेमंद तरीके से जांच कराई जाए, ताकि मामले की सचाई सामने आए और भविष्य में किसी और अभिनेत्री को ऐसे हादसे से न गुजरना पड़े।
थोड़ा अलग हटकर देखें तो अपने देश में फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, राजनीति, खेल, मीडिया समेत जीवन के तमाम क्षेत्रों में अपनी जगह बनाने में जुटी महिलाएं आज भी हद दर्जे की असुरक्षा महसूस करती हैं। इन जगहों को महिलाओं के लिए सेफ बनाने का अकेला उपाय यही है कि हर संभव मौके पर निर्णायक भूमिका वाले सत्तावान पुरुषों को यह स्पष्ट संदेश दिया जाए कि वे गड़बड़ी करेंगे तो पकड़े जाएंगे। देर चाहे जितनी भी हो जाए, पर कभी न कभी उनका मामला खुलेगा और वे लपेटे में आएंगे। जो लड़कियां आज मजबूर दिख रही हैं, कल को वे मजबूत भी हो सकती हैं। तब अगर उन्होंने हिसाब बराबर करने का फैसला किया तो ताकतवर लोगों के चेहरे से सारा रंग-रोगन एक ही झटके में झड़ जाएगा।

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