लोकायुक्त व भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा

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कैग की रिपोर्ट पर कांग्रेस व भाजपा में भिडंत
विपक्ष से ज्यादा भाजपा विधायक बने सिरदर्द
देहरादून। मानसून सत्र के आखिरी दिन आज विपक्ष द्वारा सरकार को लोकायुक्त की नियुक्ति और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा घेरा गया। वर्तमान सत्र के दौरान हालांकि कांग्रेस सरकार की घेराबंदी में उतनी अधिक सफल नहीं दिखी है लेकिन भाजपा के विधायकों द्वारा दागे गये अनुपूरक सवालों ने सरकार को मुश्किलों में जरूर डाला है।
विपक्ष कांग्रेस द्वारा आज सत्र की कार्रवाई शुरू होते ही लोकायुक्त के गठन में सरकार द्वारा की जा रही हीला हवाली के मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव लाकर नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग की गयी। हालांकि स्पीकर द्वारा कांग्रेस की मांग को अस्वीकार करते हुए इस पर चर्चा कराना ही स्वीकार किया गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की बात करते हैं वहीं वह लोकायुक्त का गठन करने से कतरा रहे हैं। उन्होनें कहा कि मुख्यमंत्री ने शपथ लेते ही भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस को सरकार की नीति बताया था तथा विधानसभा के प्रथम सत्र में ही लोकायुक्त विधेयक का प्रस्ताव लाया गया था लेकिन डेढ़ साल से लोकायुक्त का गठन अधर में लटका हुआ है। सरकार द्वारा खुद ही से लाया गया और फिर खुद ही इसे बिना किसी कारण के प्रबर समिति को सौंप दिया गया। उन्होेनें कहा कि हम जानना चाहते हैं कि लोकायुक्त पर सरकार की आखिर मंशा क्या है?
उधर प्रश्नकाल के दौरान आज कांग्रेस विधायक ममता राकेश द्वारा गौरी कन्याधन योजना और स्वास्थ्य से जुुडे कई सवाल उठाये गये। उनके द्वारा उठाये गये हेपेटाइटस-बी के सवालों पर जवाब देते हुए जब सत्ता पक्ष ने कहा कि हेपेटाइटस बी से कोई मौत नहीं हुई है तो इस पर भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन द्वारा कहा गया कि सरकार को इसकी जानकारी गलत दी गयी है। उन्होनें हेपेटाइटस-बी से तीन मौतों का उदाहरण देते हुए कहा कि अधिकारी मंत्रियों को गलत जानकारी दे रहे हैं। इसे लेकर सदन में सत्ता पक्ष आज एक बार फिर असहज नजर आया।

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