दून के स्कूलों की छवि खतरे में

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शिक्षा विभाग व स्कूल प्रबंधन को सावधान होने की जरूरत
देहरादून। शिक्षा के अब के रूप में विख्यात देहरादून के स्कूलों की छवि अब खतरे में पडती दिखाई दे रही है। एक के बाद एक यौन शोषण के मामलों ने अब दून के शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खडे कर दिये हैं। जीआरडी वर्ल्ड स्कूल में छात्र के साथ सामूहिक दुराचार और स्कूल प्रबंधन द्वारा उसे छिपाये जाने के प्रयासों के खुलासे से न सिर्फ दून के स्कूलों की छवि दांव पर लग गयी है बल्कि अभिभावकों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
तीन दिन पूर्व प्रकाश में आये इस गंभीर मामले में भले ही पुलिस ने दुराचार के आरोपी चारों छात्रें और प्रधानाचार्य सहित स्कूल प्रबंधन के पांच लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुुंचा दिया है लेकिन यह घटना अपने पीछे कई सवाल छोड गयी है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन के साथ साथ शिक्षा विभाग की लापरवाही भी साफ तौर पर सामने आ रही है। बीते साल गुरूग्राम के स्कूल में मासूम छात्र प्रद्युमन की हत्या के बाद सूबे के मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी जिला और खण्ड शिक्षा अधिकारियों को सूबे के सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिये गये थे जिनका अनुपालन अभी तक नहीं किया गया है। जिस जीआरडी वर्ल्ड स्कूल में यह घिनौनी वारदात हुई उसमें सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। सच यह है कि इन स्कूलों द्वारा निर्धारित नियम कानूनों का अनुपालन नहीं किया जाता है और न ही छात्रें की सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध होते हैं जिसके कारण इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही है। राजधानी के नेहरूग्राम में इंडियन एकेडमी और मसूरी इंटरनेशनल स्कूल की घटनाओं से अगर सबक लिया गया होता तो अब जीआरडी वर्ल्ड स्कूल में शायद इतनी बडी वारदात घटित नहीं होती।
राजधानी देहरादून में सैकड़ों की संख्या में ऐसे स्कूल हैं जिनके नाम में नेशनल और इंटरनेशनल लिखा हुआ है लेकिन इन स्कूलों में छात्रवासों से लेकर क्लासरूम और वॉसरूम तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। इन में से अनेक स्कूलों में सहशिक्षा व्यवस्था के तहत लडकें और लडकियां एक साथ पढ़ते हैं अगर हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में इस तरह की वारदातें आम हो जाएंगी और दून के स्कूल जो अपनी अच्छी शिक्षा के लिए जाने जाते थे तथा जहां अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर कोई ललायित होता था उन स्कूलों की छवि खराब होने से नहीं बचाई जा सकती। इस मुद्दे को लेकर न सिर्फ शिक्षा विभाग बल्कि स्कूल प्रबंधनों को भी सावधान होने की जरूरत है।

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