अतिक्रमण पर सदन में हंगामा

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सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार को घेरा
स्पीकर की हिदायतः मंत्री गंभीरता से दें जवाब
देहरादून। विधानसभा सत्र के आज दूसरे दिन जहां विपक्ष ने अतिक्रमण और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के मुद्दे पर जम कर सदन में हंगामा किया वहीं दूसरी ओर बिना होमवर्क के सवालों का गलत जवाब देने वाले मंत्रियों को स्पीकर ने निर्देश देते हुए कहा कि वह सवालों के जवाब गंभीरता से दें। यही नहीं सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का ठीक से जवाब न दे पाने पर भी सदन में सरकार की आज खूब किरकिरी हुई।
सुबह 11 बजे आज जैसे ही सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो विपक्ष द्वारा देहरादून में चलाए जा रहे अतिक्रमण अभियान के तहत लोगों के घर, मकान और दुकान उजाडे जाने के मुद्दे पर नियम 310 के तहत चर्चा करने की मांग की गयी जिसे स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा नकार दिये जाने पर कांग्रेस के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। बेल में आकर हंगामा कर रहे कांग्रेस विधायकों का कहना था कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत जिनके घर और दुकान तोेडे गये हैं उनके विस्थापन और सरंक्षण की जिम्मेवारी सरकार को लेनी चाहिए । अतिक्रमण हटाने के लिए जिन लोगों को बेघर किया गया है वह सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रहने पर विवश हैं। 30 और 40 साल से रह रहे इन लोगोें को इस तरह उजाड़ा जाना मानवीय मूल्यों के विरूद्व है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भाजपा विधायकों के क्षेत्र के लोगों को ही सहायता दिये जाने का मुद्दा ही कांग्रेस विधायकों द्वारा जोर शोर से उठाया गया। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत द्वारा जब इस आरोप को गलत बताया गया तो कांग्रेसी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया।
सदन की कार्रवाई के दौरान सबसे हैरान करने वाली स्थिति तब पैदा हो गयी जब स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने मंत्रियों द्वारा सवालों का गलत जवाब दिये जाने पर उन्हें निर्देश दिये कि वह सवालों का जवाब गंभीरता से दें। स्पीकर द्वारा दिये गये निर्देशों का कांग्रेसी विधायकों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया गया। सदन में इस दौरान सत्ता पक्ष अत्यंत असहज स्थिति में देखा गया। खास तौर पर भाजपा विधायक सुरेंद्र जीना द्वारा लीसा भंडारण के मामले में मंत्री हरक सिंह रावत सवालों से घिरे दिखे वहीं निकायों में आरक्षण के मुद्दे पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी ठीक से सवालों का जवाब नहीं दे सके। भाजपा विधायकों केे द्वारा उठाये गये सवालों पर सदन में मंत्रियों द्वारा सही उत्तर न दिये जाने पर सरकार की खासी किरकिरी हुई और स्पीकर द्वारा मंत्रियों को सवालों के जवाब गंभीरता से देने की हिदायत देनी पडी।

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