सरकार निवेशकों को देगी क्या व दिखायेगी क्या? 

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इन्वेस्टर्स समिट पर सुलगते सवाल 

खस्ताहाल सड़कें और कनेक्टिविटी सबसे बडी समस्या 
बिजली, पानी व भूमि तथा कुशल श्रमिकों की भी कमी 
देहरादून। उत्तराखण्ड़ सरकार द्वारा आगामी सात आठ अक्टूबर को इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जा रहा हैै। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किये जाने वाले इस आयोजन को भव्य बनाने की तैयारियों में शासन प्रशासन अभी से जुटा हुआ हैै। सरकार द्वारा इस समिट के माध्यम से 40 से 50 हजार करोड़ तक के निवेश के दावे किये जा रहे हैं लेकिन विपक्ष कांग्रेस सहित अन्य तमाम दलों के नेताओं द्वारा इसे भाजपा की जुमलेबाजी करार दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीति तो अलग बात है लेकिन प्रदेश के वर्तमान हालात को देखकर आम लोगों के जहन में अभी यह सवाल है कि देश विदेश से आने वाले निवेशकों को उत्तराखण्ड की सरकार दिखायेगी क्या और देगी क्या?
किसी भी देश या प्रदेश में निवेश करने वाले निवेशक सबसे पहले यह देखते हैं कि उन्हें किसी भी क्षेत्र में निवेश करने पर वहां की सरकार क्या क्या सुविधा उपलब्ध करायेगी तथा धरातल पर वहां क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं और इन स्थितियों और परिस्थितियों में निवेश करने पर उन्हें क्या नफा और नुकसान हो सकता है। सिर्फ सरकार के यह चाहने से कि निवेशक उत्तराखण्ड में निवेश करें, कोई भी निवेशक आंख बन्द करके पूंजी निवेश नहीं कर सकता । सरकार इन्वेस्टर्स समिट तो बुला सकती है लेकिन इस समिट में आने वाले उद्योगपतियों को वह दिखायेगी क्या? एयरपोर्ट से राजधानी तक आने वाली सड़कों के गड्ढ़े तो भर ले सरकार, वरना सड़कों पर गड्ढ़ों को देखकर ही निवेशक भाग खडे होगें।
निवेशकों के लिए अच्छी कनेक्टिविटी, बिजली, पानी, भूमि व कुशल श्रमिकों की उपलब्धता जैसी अनेक जरूरतें हैं जिनकी सहज उपलब्धता होने पर ही कोई उद्योगपति या निवेशक निवेश के लिए तैयार हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अभी इस समिट पर सवाल खडे करते हुए यही कहा था कि सरकार के पास जमींन कहां है जहां वह निवेशकों को उद्योग लगवायेगी। सिर्फ सरकार के द्वारा बनाई गयी सिंगल विंडो सिस्टम या फिर ईच ऑफ बिजनेस जैसी किसी सुविधा की बात तो बहुत बाद में आती है पहले तो निवेशकों को माकूल सुविधाएं और उचित माहौल की जरूरत होगी। राज्य गठन के समय केंद्र से मिले औद्योगिक पैकेज के दौरान राज्य में बडी संख्या में छोटे बडे उद्योग आये थे लेकिन पैकेज समाप्त होने के बाद क्या राज्य की सरकारें इन उद्योगों को रोके रखने में कामयाब हुई? यह तो इस आयोजन के बाद ही पता चल सकेगा कि राज्य में कितना निवेश आता है और कितना रोजगार सृजित होता है तथा कितने निवेशक दीर्घकाल तक मैदान में डटे रह पाते हैं।

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