अगड़े-पिछड़ों के वोटाें पर राजनीतिक जंग

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पहाडों पर भी दिखा सवर्णों के बंद का असर 
जाति व धर्म के नाम पर ’बांटो, लड़ाओ व राज करो’ की राजनीति आखिर कब तक
देहरादून। देश में सबसे लम्बे समय तक राज करने वाली कांग्रेस ने जो किया था, अब सत्ता में आने के बाद भाजपा भी वही कर रही है। जैसे जैसे आम चुनाव करीब आ रहे हैं वैसे वैसे देश में जाति व धर्म से जुडे मुद्दों को लेकर संघर्ष सडकों तक आता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशाेंं को ताक पर रखकर एससी एसटी एक्ट में अध्यादेश लाकर जो संशोधन किया गया है उसके खिलाफ आज सवर्णों द्वारा बुलाये गये भारत बंद के दौरान कई राज्यों में भारी बवाल देखने को मिला है। इससे पूर्व दो अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एससी एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्रतारी पर रोक के खिलाफ एससी एसटी समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे थे। तथा पूरे देश में हिंसा और आगजनी की घटनाएं देखने को मिली थी। जाति और धर्म के नाम पर इस समय एससी एसटी और सवर्ण एक बार फिर आमने सामने हैं। भाजपा जो हिन्दू वोट बैंक पर अपना एकाधिकार समझती है, के द्वारा अब दलित और पिछडों के वोट बैंक पर कब्जे के लिए लाये गये इस अध्यादेश ने पूरे देश में विवाद खडा कर दिया है। सवाल यह है कि देश में आखिर यह जाति, धर्म और क्षेत्रवाद की राजनीति से हमारे नेता और राजनीतिक दल कब उबर सकेंगे।
जिन राज्यों में आगामी छह माह के अंदर चुनाव होने हैं उन राज्यों में आज के इस सवर्ण भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश तथा बिहार सहित पूरे देश में इस दौरान रेल रोके जाने और सडक जाम किये जाने से लेेकर थानों तक में प्रदर्शन की खबरें हैं। कई स्थानों  पर लाठीचार्ज और आगजनी की भी खबरें हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की राजधानी में हालांकि इस बंद का कोई व्यापक असर नहीं देखा गया सिर्फ कुछ स्कूली छात्र छात्रओं ने जााति के आधार पर आरक्षण खत्म करने और आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग को लेकर रैलियां निकालकर एसडीएम को ज्ञापन दिये गये हैं तथा कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा भी केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन किये गये हैं लेकिन पहाडी जनपदों में आज के बन्द का व्यापक असर भी देखने को मिला। पौड़ी, टिहरी, श्रीनगर, अल्मोड़ा में जहां बाजार और सार्वजनिक प्रतिष्ठान बन्द रहे वहीं बागेश्वर में एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने एनएच 309 पर जाम लगा दिया। जिसके कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पडा। इस बन्द का असर रूडकी में भी व्यापक स्तर पर देखा गया है जहां जातिगत आरक्षण को खत्म करने की मांग को लेकर छात्रें द्वारा जबरदस्त प्रदर्शन किया गया।

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