नोटबंदी: खोदा पहाड़, निकली चुहिया

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भाजपा को खुद ही ले डूबा कालेधन का मुद्दा
नोटबंदी ने कर दिया काले धन को सफेद
देहरादून। आरबीआई के इस खुलासे से कि नोटबंदी के बाद देश के बैंकों में पुरानी करेंसी 99-30 प्रतिशत वापस जमा हुई सिर्फ 10 हजार करोड़ के नोट वापस नहीं, नोटबंदी के उद्देश्यों पर सवाल खडा करने के लिए काफी है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस बडे फैसले से तीन लाख करोड मूल्य के कालेधन के रद्दी हो जाने की घोषणा की थी। जिसकी तुलना में 10 हजार करोड बहुत छोटी रकम है इससे ज्यादा तो नये नोटों की छपाई पर अब तक खर्च किया जा चुका है।
आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री ने देश में चल रहे हजार और पांच सौ के नोटों को जब तत्काल बंद करने की घोषणा की थी तो उनके निर्णय ने देशवासियों को चौंका दिया था लेकिन साथ उन्होंने इसे उस कालेधन पर सबसे बडा प्रहार लगाया बताया था जिस मुद्दे पर देश की जनता ने उन्हें और भाजपा को बंपर जीत दिखाई थी। मोदी ने नोटबंदी से काले धन के सफाये और आतंकवाद के कमर तोडने तथा डिजिटल लेन देन बढ़ने से भ्रष्टाचार समाप्त होने का दावा किया था। देश को भरोसा दिलाया था कि उनकी नोटबंदी का यह फैसला देश के लिए गेम चेंजर साबित होगा। सच यह है कि सौ दिन में विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने का जो वायदा भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में किया था वह पूरा नही हो सकता था इससे जनता का ध्यान हटाने के नोटबंदी के जरिए देश के कालेधन प्रहार का यह नया तरीका भाजपा और सरकार द्वारा खोजा गया।
जनता जिसने 2014 के चुनाव में भाजपा पर भरोसा दिखाया था उसने 2016 में मोदी के नोटबंदी के निर्णय पर पूरा विश्वास किया उनके निर्णय के समर्थन में देश के लोगों ने चार महीने तक भारी दिक्कतें उठाई और उफ तक नहीं किया। लेकिन अब आरबीआई की रिपोर्ट नोटबंदी के बाद देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर प्रभाव सारी की सारी स्थिति और तस्वीर साफ हो चुकी है। मोदी सरकार के मंत्री चाहे कुछ भी तर्क दे रहे हों लेकिन उनका यह निर्णय खोदा पहाड निकली चूहिया जैसा साबित हो चुका है। देश के उद्योगों व रोजगार को इससे बडा झटका तो लगा ही है। साथ ही काला धन कुबेरों का धन भी इस निर्णय से सफेद हो चुका है। भले ही वह बैंकिंग सिस्टम की कमी से हुआ हो या सरकार की नीतियों की खामियों और दूर दृष्टिता की कमी से हुआ हो।
18 लाख संदिग्ध खातों की पडताल या तीन लाख फर्जी कंपनियों पर तालाबंदी को बडी कामयाबी बताकर अथवा आईटीआर भरने वालों की संख्या में 18 फीसदी वृद्वि व आयकर की अधिक वसूली की बात सिर्फ अपने किये पर लीपापोती ही है। सच यह है कि सरकार को अब इस मुद्दे पर जवाब देते नहीं बन रहा है। 2019 के चुनाव में भाजपा कालेधन, भ्रष्टाचार और नोटबंदी का जिक्र भी करेगी इसकी संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं। इसीलिए वह हर गरीब को घर और किसानों की आय दोगुनी होने का राग आलाप रही है।

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