हिप हिप हुर्रे

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एशियन गेम्स में भारतीय खिलाडिय़ों ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके सबका दिल जीत लिया है। भारत ने 15 गोल्ड और 24 सिल्वर मेडल समेत 69 मेडल जीते। इससे पहले उसने 2०1० में चीन के ग्वांगझू में हुए एशियन गेम्स में 65 मेडल हासिल किए थे। हमारे खिलाडिय़ों ने उन खेलों में भी अपना जलवा दिखाया जिनमें भारत की अब तक कोई खास पहचान नहीं थी। हमने उस दौर को पीछे छोड़ दिया है जब माना जाता था कि देश में क्रिकेट के अलावा किसी और खेल का माहौल ही नहीं है। बाकी खेलों में भारतीय खिलाड़ी बस अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जाते हैं।
तब यहां तक कहा जाता था कि एथलेटिक्स जैसे खेलों के लायक भारतीयों की मनोदैहिक संरचना ही नहीं है। खैर उस एथलेटिक्स में भी हमें इस बार शानदार सफलता मिली है। हेप्टाथलॉन में स्वप्ना बर्मन ने देश को पहली बार गोल्ड मेडल दिलाया। करीब पांच दशकों के बाद अरपिंदर सिंह ने तिहरी कूद (ट्रिपल जंप) में गोल्ड मेडल जीता। एशियाड में टेबल टेनिस, बैडमिंटन, नौकायन और महिला कुश्ती में भारतीयों के सफल होने की बात दूर की कौड़ी मानी जाती थी, लेकिन इस बार हमने इन क्षेत्रों में भी झंडे गाड़े और कई अन्य क्षेत्रों में कड़ी चुनौती पेश की। ब्रिज जैसे अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय खेल में भी भारतीय खिलाडिय़ों ने गोल्ड जीतकर सबको चकित किया। देश को मेडल दिलाने में युवा खिलाडिय़ों का जबर्दस्त योगदान रहा। 1० मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतने वाले सौरभ चौधरी महज 16 साल के हैं। ट्रैप इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले लक्ष्य की उम्र 19 साल है। डबल ट्रैप में सिल्वर मेडल जीतने वाले शार्दुल विहान 15 साल के हैं। यह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अलग-अलग खेलों में रुचि ले रही है और उसे समुचित प्रशिक्षण मिलने लगा है। कई खिलाड़ी तो बेहद पिछड़े इलाकों और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आए हैं, मगर उनके जज्बे में कोई कमी नहीं है। इस बार सबसे बड़ा उलटफेर था कबड्डी में। एशियन गेम्स में कबड्डी का गोल्ड मेडल भारतीय टीम के लिए तय माना जाता था। लेकिन इस बार पुरुष और महिला दोनों ही टीमों ने निराश किया।
इस पर विचार होना चाहिए कि दूसरे देश हमसे सीखकर हमें ही कैसे हरा रहे हैं? हमें अपनी तैयारी और मजबूत करनी होगी। यह बात तो तय है कि समाज में खेल को लेकर एक पॉजिटिव माहौल बन गया है। सरकार की जागरूकता का असर दिख रहा है। विदेशी कोच लाने का प्रयोग सफल हुआ है। कई नई अकादमियां खुलीं हैं जिनका युवाओं को फायदा मिल रहा है। लेकिन खेलों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों में और गति लाने की जरूरत है। आज हरियाणा जैसे राज्य से ही काफी ज्यादा खिलाड़ी आ रहे हैं। खेलों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देशभर में फैलाना होगा। नौकरशाही संबंधी बाधाएं भी दूर करनी होंगी, तभी ओलिंपिक में भी हमें झोली भरकर मेडल मिल सकेंगे।(आरएनएस)

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