सरकारी स्कूलों की बदहाली दूर कीजिए

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दरअसल, बीमार भविष्य के कारखाने बने सरकारी स्कूलों की बदहाली की जड़ें बहुत गहरी हैं। राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में निहित स्वार्थों को सींचने वाला ऐसा तंत्र विकसित हो गया है जो सरकारी स्कूलों का भविष्य दांव पर लगा रहा है। स्कूलों में संसाधनों व शिक्षकों की कमी और शिक्षण पद्धति की तमाम खामियों से परिचित होते हुए भी शिक्षा विभाग के लोग आंखें बंद किये बैठे हैं। साल-दर-साल सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट आ रही है, मगर इसके बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाती। इस बात की भी पड़ताल नहीं होती कि पंजाब व हरियाणा के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक निर्धारित शैक्षिक योग्यता रखते हैं या नहीं। यह भी कि क्या वे ऐसा पढ़ा रहे हैं कि विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे अंक ला सकें। इसके विपरीत कई स्कूलों में अंग्रेजी और गणित में उत्तीर्ण छात्रों से जब सवाल पूछे गये तो वे बगलें झांकते नजर आये। जाहिरा तौर पर उनकी पढ़ाई के प्रति शिक्षक गंभीर नहीं थे। जो शिक्षा से इतर अन्य गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं।
जरूरत शिक्षकों को जवाबदेह बनाने तथा परीक्षा परिणामों में शिक्षकों की भूमिका की पड़ताल करने की है। कई स्कूलों में रिजल्ट ठीक करने के क्रम में फेल छात्र-छात्राओं को पास करने के मामले भी सामने आये हैं। जिसके लिये शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। तमाम स्कूलों में रिजल्ट खराब होने पर जवाबदेह शिक्षकों को विभागीय कार्यवाही से सचेत किया जाना चाहिए। अन्यथा सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट का ट्रेंड जारी रहेगा। कुछ शिक्षक अपने बूते बेहतर कर रहे हैं मगर ऐसे लोगों को प्रोत्साहन नहीं मिलता। इसके अलावा कई ऐसे प्रकरण अनियमितताओं को लेकर सामने आते हैं जो शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करते हैं। हरियाणा के रेवाड़ी जनपद में छिल्लर पंचायत के लोगों ने शिक्षा विभाग को चेताया था कि गांव के स्कूल में 156 विद्यार्थियों के लिये विज्ञान व गणित के शिक्षक नहीं हैं मगर शिक्षा विभाग ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। गुस्साये ग्रामीणों ने एक दिन के लिये न केवल स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया बल्कि पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। शिक्षा विभाग को आत्ममंथन करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अधिकारियों की तदर्थवादी नीतियां समस्याओं के समाधान में सहायक होने के बजाय समस्याओं को और बढ़ाती हैं। (आरएनएस)

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