शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है: डॉ. राधाकृष्णन

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अपने जीवन में आदर्श शिक्षक रहे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाष्णन का जन्म ५ सितंबर, १८८८ को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था। इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे। इनकी मां का नाम सीतम्मा था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में हुई। इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की। १९०३ में युवती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ।
राधाकृष्णन ने १२ साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था। उन्होंने दर्शन शास्त्र से एमए किया और १९१६ में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। उन्होंने ४० वर्षाे तक शिक्षक के रूप में काम किया।
वह १९३१ से १९३६ तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इसके बाद १९३६ से १९५२ तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे और १९३९ से १९४८ तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे। उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया।
साल १९५२ में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले १९५३ से १९६२ तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे। इसी बीच १९५४ में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया। डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में सर की उपाधि भी दी गई थी। इसके अलावा १९६१ में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा विश्व शांति पुरस्कारश् से भी सम्मानित किया गया था। कहा जाता है कि वे कई बार नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुए थे।
डॉ. राधाकृष्णन ने १९६२ में भारत के सर्वाेच्च, राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। जानेमाने दार्शनिक बर्टेड रशेल ने उनके राष्ट्रपति बनने पर कहा था, भारतीय गणराज्य ने डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति चुना, यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है। मैं उनके राष्ट्रपति बनने से बहुत खुश हूं। प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिक को राजा और राजा को दार्शनिक होना चाहिए। डॉ राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाकर भारतीय गणराज्य ने प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि दी है।
वर्ष १९६२ में उनके कुछ प्रशंसक और शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने कहा, श्मेरे लिए इससे बड़े सम्मान की बात और कुछ हो ही नहीं सकती कि मेरा जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। और तभी से पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाता है।
डॉ. राधाकृष्णन का निधन १७ अप्रैल, १९७५ को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। वैसे तो विश्व शिक्षक दिवस का आयोजन पांच अक्टूबर को होता है, लेकिन इसके अलावा विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में यह अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है, भूटान में दो मई को तो ब्राजील में १५ अक्टूबर को। कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में ३० जनवरी, मेक्सिको में १५ मई, पराग्वे में ३० अप्रैल और श्रीलंका में छह अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

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