नोटबंदी से क्या मिला?

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नोटबंदी से देश की जनता को क्या मिला? यह सवाल एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है बीते कल आरबीआई द्वारा नोटबंदी के बाद वापस बैंकों में जमा हुए एक हजार पांच सौ के नोटों की गिनती पूरी करने और कुल चलन में नोटों का 99-30 प्रतिशत वापस जमा होने का आंकडा सार्वजनिक किया तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सारे नोट वापस आ गये तो वह कालाधन कहां गया जिसके सफाये की बात कह कर सरकार ने पुराने नोटों को चलन से बाहर किया था। आरबीआई के अनुसार सिर्फ 11 हजार करोड़ ऐसे बचे जो जमा नहीं हुए यानि क्या सिर्फ 11 हजार करोड़ ही कालाधन था पूरे देश में 1 इससे भी हास्यापद बात यह है कि सरकार ने पिछले दो साल में नये नोटों की छपाई कराने में 13 हजार करोड़ खर्च कर दिये। अब विपक्ष के नेता सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि सरकार ने यह नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने के लिए ही की थी जिन के भी पास जितना भी कालाधन था वह नोटबंदी में सब सफेद हो गया। एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में अभी पुराने नोटों की बरामदगी का सिलसिला थम नहीं रहा है। सरकार ने जब नोटबंदी की थी तो इसके तीन प्रमुख उद्देश्य बताये गये थे। पहला था कालेधन का खात्मा और दूसरा था आतंकवाद पर प्रहार तथा तीसरा था जाली करेंसी पर लगाम। अब सवाल यह है कि क्या बीते दो साल में देश में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकी है जिसका साफ साफ उत्तर हैं नहीं। इन दो सालों में बजाय घटने के आतंकवादी गतिविधियां बढ़ी है इन आतंकियों को फंडिंग कहां से हो रही है या उनके पास नये नोट कैसे पहुंचे इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। रही बात फेक करेंसी की तब क्या आज बाजार में नकली नोट नही चल रहे है। सरकार जब नई करेंसी की कमी से जूझ रही थी और देश के लोग लाइन बना कर एटीएम व बैंकों के बाहर खडे थे उसी समय बाजार में नये दो हजार व पांच सौ के नोट भी आ गये थे। नोटबंदी के दौरान कितने उद्योग बंद हुए या कितने लोग बेरोजगार हुए अलग बात है लेकिन देश के जीडीपी में दो प्रतिशत तक गिरावट की बात को सरकार भी नहीं नकार सकती है अब सत्ता में बैठे लोग तर्क दे रहे हैं कि नोटबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को कैशलेश बनाया गया है पर जो फर्जी लाखाें कंपनियां पकडी गयी या जिन खातों में अनाप शनाप धन जमा हुआ उनकी जांच जारी है जो कालेधन पर बडा प्रहार है लेकिन जितना आम आदमी की समझ आया या आ रहा है वह यह है नोटबंदी और कैशलेश अथवा डिजिटल इंडिया की बात सिर्फ छलावा है तथा नोटबंदी नौ दिन चले अढ़ाई कोस जैसी कहावत को चरितार्थ करने वाला है।

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