उर्जा क्षेत्र में लम्बी छलांग

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उत्तराखण्ड राज्य गठन के साथ सूबे को उर्जा प्रदेश के रूप में विकसित करने का जो सपना देखा गया था वह अब लखवाड़ जल विद्युत परियोजना को हरी झण्डी मिलने से साकार होता दिखाई दे रहा है। भले ही एनडी तिवारी के नेतृत्व वाली सूबे की पहली निर्चावित सरकार द्वारा राज्य में मनेरी भाली और नागपाला जैसे आधा दर्जन से अधिक बडी जल विद्युत परियोजनाओं की आधार शिला रखी गयी थी लेकिन सूवाई राजनीति ने इन परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ने दिया गया यही कारण है उत्तराखण्ड जैसा राज्य जिसमें उर्जा उत्पादन की असीम संभावनाएं मौजूद है, के बावजूद भी अपने घरेलू जरूरत के लिए बिजली उत्पादन नहीं कर पाया है और आज भी केंद्रीय पूल और हिमांचल जैसे राज्यों से बिजली खरीद कर या उधार लेकर अपना काम चलाने पर विवश है। खास बात यह है आज जिन भाजपा नेताओं द्वारा लंबित पड़ी बिजली परियोजनाओं पर पुनः काम शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से मुहर लगाई जा रही है या लखवाड़ योजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अपनी और केंद्र सरकार की पीठ थपथपी कर यह प्रचारित किया जा रहा है कि यह डबल इंजन सरकार का कमाल है वही भाजपा नेता साधुसंतों के विरोध के कारण राज्य की परियोजनाओं बंद कराने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पत्र लेकर पहुंचे थे लेकिन देर से ही सही यह एक शुभ संदेश है कि अब राज्य में उर्जा परियोजनाओं के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। बीते कल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अगुवाई में लखवाड़ बिजली परियोजना जिसका प्रस्ताव 1976 में आया था तथा जिसका 40 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने के बावजूद भी जो 1994 या निलकमग ढ़ाई दशक से अधर में लटकी हुई थी, अब इसका निर्माण कार्य सिर्फ सिर्फ आगामी चार साल में पूरा किये जाने की संभावना है। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो इस परियोजना के पूरे होने उत्तराखण्ड़ के 300 मेगावाट बिजली मिल सकेगी जो इस सूबे के न सिर्फ उर्जा उत्पादन में आत्म निर्भर बनायेगी अपितु उसकी आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकेगी। यहीं इस परियोजना से जुडी किसी और योजना के भी धरातल पर उतरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अच्छी बात यह है कि इस योजना से पैदा होने वाली बिजली पर उत्तराखण्ड का अधिकार होगा बांध से मिलने वाला पानी भले दिल्ली, राजस्थान, यूपी की प्यास बुझाये लेकिन बिजली उत्पादन यूनिट पर राज्य का कब्जा होगा। केंद्र सरकार परियोजना पर आने वाले खर्च का 90 फीसदी वहन करने को तैयार है। इसलिए कोई आर्थिक समस्या भी आड़े नही आयेगी। उत्तराखण्ड सरकार को इस पर कुल जमा 1475 करोड़ खर्च करना है लेकिन उसको इसका बडा फायदा होने वाला है। जो केंद्र की सहायता व मदद से ही संभव हो सका है। अब सरकार का अन्य लंबित पडी उर्जा परियोजनाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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