सरकार के लिए होगा जीरो टालरेंस पर लिटमस टेस्टः जुगरान

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पूर्व डीजीपी सिद्धू प्रकरण

हमारे संवाददाता
देहरादून। भ्रष्टाचार के विरूद्व सरकार की जीरो टोलरेन्स नीति को पलीता लगा रही है नौकरशाही, पूर्व डीजीपी सिद्धू प्रकरण सरकार के लिए होगा जीरो टोलरेन्स पर लिटमस टेस्ट।
यह बात आज प्रैस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा नेता रविन्द्र जुगरान ने कही। उन्होने कहा कि सरकार की जीरो टालरेंस नीति को प्रदेश की नौकरशाही ठण्डे बस्ते में डालने का काम कर रही है। उन्होने कहा कि पूर्व डीजीपी सिद्धू पर उनके डीजीपी चयन से पहले ही कई आरोप लगे थे अगर डी-पी-सी- में सिद्धू के ऊपर लगे आरोपों का संज्ञान लिया होता तो वह डीजीपी नहीं बन सकते थे। उन्होने कहा कि पूर्व डीजीपी पर 2012-13 में आय से अधिक सम्पत्ति पर जांच के लिए सीबीआई ने अनुमति मांगी थी लेकिन तत्कालीन सरकार ने यह अनुमति नहीं दी और मामले को तकनीकि बिन्दुओं में फंसा दिया। उन्होने कहा कि नियुक्ति के दौरान ही पूर्व डीजीपी ने राजपुर के वीरगिरी में नौ बीघा जमीन को धोखाधड़ी कर हथिया लिया इतना ही नहीं उन्होने 25 साल के पेड़ कटवा कर वन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। यही नहीं उन्होने विरोध जताने पर अपने ही विभाग के आईपीएस व उपनिरीक्षक के खिलाफ फर्जी मुकदमें दर्ज करा दिये थे। इस दौरान दो महिलाओं ने पूर्व डीजीपी पर यौन शोषण के आरोप लगाये थे। उन्होने कहा कि 27 अगस्त को एनजीटी का आया फैसला वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार के विरूद्व जीरो टालरेंस का लिटमस टेस्ट साबित होने वाला है। कहा कि अभी तक जमीनी फर्जीवाड़े में अपने पद का दुरूपयोग करने के मामले व दो महिलाओं के यौन शोषण मामले मे अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है क्या सरकार इन मामलों में एफआईआर पजींकृत करने का साहस दिखा पायेगी या जीरो टालरेंस जीरो ही साबित होगा।

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