निजी अस्पतालों में 66 फीसदी बच्चे ऑपरेशन से पैदा हो रहे

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हल्द्वानी। प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम अधिकांश प्रसव ऑपरेशन से करवा रहे हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में नैनीताल जिले के आंकड़े से इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों में 66 फीसदी बच्चे ऑपरेशन (सिजेरियन) से पैदा हो रहे हैं। इसके उलट सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 4० फीसदी प्रसव के मामलों में ही ऑपरेशन की नौबत आती है। सर्वे रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 12 फीसदी प्रसव ही प्रशिक्षित दाइयों और हेल्थ वर्करों से हो रहे हैं। शहरी इलाकों में यह प्रतिशत अधिक है।
गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने के लिए ऑपरेशन एक शॉर्टकट तरीका माना जाता है। पर निजी चिकित्सक सामान्य प्रसव के बजाए ऑपरेशन से होने वाले प्रसव को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। हालांकि डॉक्टर इसका एक मुख्य कारण प्रसूता और नवजात की सेहत का रिस्क न लेना भी बताते हैं। पर आर्थिक पक्ष भी सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों का अहम पहलू है। प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव कराने पर 25 से 35 हजार रुपये तक खर्च आम है। यही कारण है कि प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम आयुष्मान भारत बीमा योजना में पंजीकरण कराने से भी कतरा रहे हैं, क्योंकि आयुष्मान योजना में सरकार ने ऑपरेशन से प्रसव पर नौ हजार रुपये देने का प्रावधान किया है। एसटीएच में हर माह 3०० बच्चों का जन्म: हल्द्वानी के एसटीएच में हर महीने औसतन 3०० बच्चों का जन्म हो रहा है। बीते छह महीने में सुशीला तिवारी अस्पताल में 184० बच्चों ने जन्म लिया। इनमें से 935 बालक और 9०5 बालिकाएं शामिल थी।
हल्द्वानी महिला अस्पताल की सीएमएस और महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि प्रसव के दौरान मां या बच्चे को खतरा होने पर सिजेरियन डिलीवरी जीवन बचाती है। इसलिए इसे गलत नहीं कहा जा सकता। गर्भावस्था के दौरान अगर महिलाएं अपना ध्यान रखें तो सामान्य प्रसव ज्यादा आसान होता है।(आरएनएस)

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