भारत के निकट भी, दूर भी

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जय प्रकाश पाण्डेय
सर विदिया भारतभूमि पर पैदा न होकर भी जन्मजात भारतीय थे। उनका पूरा नाम विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल था। यह नायपॉल नेपाल से आया था और उनके पूर्वज गिरमिटिया के रूप में कैरेबियाई देश त्रिनिदाद गए थे। 17 अगस्त, 1932 को वहीं विद्याधर सूरजप्रसाद का जन्म हुआ। गरीबी और संघर्ष उन्होंने बचपन में ही देख लिया था पर उनकी मेधा इससे और भी मंजी। उन्हें पता था कि पिता के पास इतने संसाधन नहीं, सो अगर उन्हें उच्च शिक्षा पानी है, तो खुद ही पढ़ाई के लिए जरूरी रकम की व्यवस्था करनी होगी।
स्कूली शिक्षा में अपनी मेहनत से साल 195० में उन्होंने एक सरकारी स्कॉलरशिप जीती, जिससे उन्हें कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल सकता था, लेकिन उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को चुना। कहते हैं छात्र जीवन में अवसाद की वजह से उन्होंने खुदकुशी करने की कोशिश भी की थी, पर ऑक्सफोर्ड में अंग्रेजी भाषा पर उन्होंने ऐसी पकड़ हासिल की कि उसने उनकी समूची दुनिया तो बदली ही, साहित्य को भी एक जाज्वल्यमान सितारा दे दिया। अपनी लेखनी के बूते उनमें पूरी दुनिया को झकझोर देने का माद्दा था।
नायपॉल का भी विवादों से गहरा नाता रहा। नायपॉल की गिनती ऐसे लेखकों में की जाती है, जिसे सच कहने से कभी गुरेज नहीं था। उन्होंने लेखन के क्षेत्र में जितना नाम कमाया वह किसी भी लेखक के लिए सपना है। उन्होंने तीस से अधिक किताबें लिखीं और भारत को अपने समस्त जुड़ाव के बावजूद उसकी कमियों के साथ देखा। नायपॉल ने भारत पर ‘एन एरिया ऑफ़ डार्कनेसÓ, ‘इंडिया: ए मिलियन म्यूटिनीज नाऊÓ और ‘ए वुंडेड सिविलाइज़ेशनÓ जैसी किताबें लिखीं।
‘इंडिया : ए वुंडेड सिविलाइजेशनÓ की भूमिका में उन्होंने लिखा, ‘भारत मेरे लिए एक जटिल देश है। यह मेरा गृह देश नहीं है, सो मेरा घर भी नहीं हो सकता। लेकिन फिर भी मैं इसे न खारिज कर सकता हूं, न ही इसके प्रति उदासीन हो सकता हूं। न मैं इसके दर्शनीय स्थानों पर सिर्फ पर्यटक बनकर आता-जाता रह सकता हूं। मैं एक साथ इसके बहुत निकट हूं और दूर भी।Ó
उनके आलोचक उनके दक्षिणपंथी रुझान, इस्लाम विरोधी रवैये, निजी जीवन में बहुविवाह को लेकर हमला बोलते हैं। पर इन पर उनका स्पष्ट मत था। साल 1999 में ‘आउटलुकÓ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भारत की सहस्राब्दी की शुरुआत काफ़ी त्रासदीपूर्ण रही है। लोग लिखते हैं कि मुसलमान भारत आए। हारे हुए लोग कभी अपना इतिहास नहीं लिखते। विजेता अपना इतिहास लिखते हैं और मुसलमान विजेता थे।Ó नायपॉल की पहली किताब ‘द मिस्टिक मैसरÓ 1951 में प्रकाशित हुई थी। उनकी कुछ और मशहूर कृतियों में ‘इन ए फ्री स्टेटÓ, ‘ए बेंड इन द रिवरÓ, ‘अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वासÓ, ‘हाफ ए लाइफÓ और ‘मैजिक सीड्सÓ शामिल हैं। उन्हें साल 1971 में बुकर प्राइज और 2००1 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 2०18 के 11 अगस्त को इस महान लेखक ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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