बढ़ते महिला अपराधों की चुनौती

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बीते कल रायपुर थाना क्षेत्र में लडकियों से छेड़छाड़ का जो मामला आया उसमें आरोपी की गिरफ्रतारी के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक अन्य घटना राजधानी के कोतवाली क्षेत्र में सामने आई जिसमें 14 साल की नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को गिरफ्रतार कर लिया गया। वहीं रूडकी के एक गांव में गन्ने के खेत से एक युवती की लाश बरामद हुई जिसके साथ दुष्कर्म व हत्या की आशंका जताई जा रही है यही नहीं हरिद्वार में बीते कल हरियाणा के रोहतक निवासी युवती से दुष्कर्म का भी मामला सामने आया है जो यह बताते हैं कि सूबे में महिलाओं की सुरक्षा कितनी बडी चुनौती बन चुका है। उत्तरकाशी में दलित नाबालिग लडकी की रेप के बाद हत्या को लेकर हंगामा अभी थमा नहीं हैै यहीं नहीं राजधानी दून स्थित एनआईवीएच में शिक्षकों द्वारा दृष्टिहीन लडकियों के यौन उत्पीडन का मामला बीते एक सप्ताह से खबरों की सुर्खियों में है। इससे पूर्व नारी निकेतन भी चर्चाओं के केंद्र में रह चुका है। सवाल यह है कि देवभूमि में लडकियों और महिलाओं के साथ आखिर क्या हो रहा है। पुलिस विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी मानो इस तरह के मामलों की बाढ़ सी आई हुई है। सूबे में बढ़ती इन यौन अपराधों की वारदात पर नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा अगर स्वतः संज्ञान लिया गया है वह बेवजह नही है। इससे यह साफ होता है कि स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो चुकी हैै। अभी बीते दिनों नाबालिग बच्चियों से बढ़ती दरिंदगी की घटनाओं के चलते केंद्र सरकार द्वारा 12 वर्ष से कम उम्र की लडकियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में फांसी की सजा का अध्यादेश लाया गया था जो पूरे देश में लागू है हालांकि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को संशोधन की छूट दी थी लेकिन उत्तराखण्ड सरकार अभी तक बच्चियों के साथ होने वाले इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान नहीं ला सकी है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार से ऐसे मामलों की जांच के लिए सभी जिलों में एसआईटी गठित करने तथा निचली अदालतों में तुरंत सुनवाई के निर्देश दिये है लेकिन इतने सारे भागीरथी प्रयासों का धरातल पर कोई असर नही दिख रहा है। दरिंदगी की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। हर रोज किसी न किसी हिस्से में इस तरह की घिनौनी वारदातें हो रही है। पुलिस अधिकारियों द्वारा भी उक्त सभी थानों को निर्देश दिये है कि महिलाओं की रिपोर्ट पर तुरंत गंभीरता से कार्यवाही की जाए। देवभूमि की छवि को इस तरह की वारदातें कलंकित कर रही है। खास बात यह है कि ऐसे मामलों को लेकर बाहरी व्यक्तियों के सर इल्जाम लगाकर पल्ला झाड लिया जाता है जबकि इन वारदातों में आसपास के लोग ही होते हैं। महिलाओं पर बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाये जाने की जरूरत है।

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