अब कैसे बच पाएंगी अवैध बस्तियां ?

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रिस्पना व बिंदाल नदियों से अवैध कब्जे हटाने ही होंगे
12000 के करीब अवैध कब्जे हैं रिस्पना व बिंदाल में
देहरादून। भले ही सरकार द्वारा राजधानी दून की अवैध बस्तियों को बचाने के लिए अध्यादेश लाया जा चुका हो और सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें थोडे समय की राहत दी जा चुकी है लेकिन बीते कल नैनीताल हाईकोर्ट ने नदियों के किनारे आवंटित पट्टों को निरस्त करने और छह माह में अवैध निर्माणों को हटाने के जो निर्देश भूराजस्व विभाग को दिये हैं उनसे यह साफ हो गया है कि एक न एक दिन इन अवैध बस्तियों और निर्माणों पर बुलडोजर जरूर चलेगा चाहे वह सरकारी हों या गैर सरकारी।
नैनीताल हाईकोर्ट के इस निर्णय का सर्वाधिक प्रभाव दून में रिस्पना और बिंदाल के क्षेत्र के इलाकों पर सबसे अधिक पडेगा। इन नदियों के पांच किमी के दायरे में पचास हजार से भी ज्यादा अवैध कब्जे हैं जिसमें नेताओं द्वारा बसाई गई अवैध कालोनियां ही नही हैं अपितु तमाम सरकारी भवन भी शामिल हैं। ऐ से में राजीव नगर भगत सिंह कालोनी, वाणी विहार, अधोईवाला, केदारपुरम सहित अनेक कालोनियां के अलावा दूरदर्शन केंद्र, दून विश्वविद्यालय, विधानभवन, नेहरू कालोनी थाना, सचिवालय कालोनी व आंगनवाडी केंद्र सहित अनेक भवन ऐसे हैं जो हाईकोर्ट के इस दायरे में आतेे हैं। अगर हाईकोर्ट के आदेशाें का पालन किया जाता है जिसमें कोर्ट ने सभी भूमि आवंटन के मामलों की जांच कर तीन माह में रिपोर्ट देने और अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करने और बेदखल की कार्रवाई छह सप्ताह में करने के आदेश दिये हैं। इन नदियों के किनारे बसी बस्तियों को हटाया जाना अब तय हो चुका है।
यह उल्लेखनीय है कि जून मेें हाईकोर्ट द्वारा राजधानी दून के अतिक्रमण को चार सप्ताह में हटाने के निर्देश दिये गये थे जिस पर शासन प्रशासन द्वारा अब तक सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करते हुए मुख्य सडकों से ही अवैध अतिक्रमण हटाया जा सका है। नगर निगम द्वारा अवैध कालोनियों में रहने वालों को नोटिस जारी करने की कार्रवाईयों के बावजूद भी यहां अतिक्रमण हटाने का काम जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण नहीं किया जा सका है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की आपत्तियां सुनने के लिए समय दे दिया था जिससे यह मामला अधर में लटक गया और इसी बीच सरकार ने अध्यादेश लाकर इन बस्तियों को उजडने से बचा लिया था। भले ही अतिक्रमण हटाओ अभियान में इन बस्तियों को राहत मिल रही हो लेकिन अब नदियों किनारे भूमि आवंटन और पट्टों को रद्द किये जाने के निर्णय से एक बार फिर इन पर कार्रवाई किये जाने का रास्ता साफ हो गया है।
भले ही सरकार की रिवर फ्रंट डवलपमेंट योजना इस काम को न कर पाई हो या फिर सरकार ने अतिक्रमण हटाओ अभियान को ठेंंगा दिखाते हुए इन कालोनियों को बचा लिया गया हो लेकिन नदियों के किनारे बसी इन बस्तियों और अवैध निर्माणों को बचा पाना अब एक बडी चुनौती होगा।

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