नींद की गोलियां बढ़ाती हैं अल्जाइमर का खतरा

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लंदन । एक ताजा अध्ययन में सामने आया है कि जो लोग नींद के लिए उच्च पोटेंसी की गोलियां लेते हैं, उन्हें अल्जाइमर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नींद के लिए एक तय मात्रा से ज्यादा दवा लेते हैं, वे अल्जाइमर की चपेट में अन्य लोगों की तुलना में जल्दी आ जाते हैं। यह शोध ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों पर किया गया है। यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि ब्रिटेन में 260000 लोग और अमेरिका में 100 मिलियन यानी 10 करोड़ लोग बेंजोडायजेपीन्स और जेड ड्रग महीने में कम से कम एक बार लेते हैं।
अध्ययन में कहा गया गया कि इस ड्रक का इस्तेमाल चार सप्ताह से ज्यादा किसी भी कीमत में नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद भी अगर ये दवाएं लेनी पड़ती हैं, तो कम मात्रा में लेना चाहिए। डॉक्टर इन शक्तिशाली दवाओं को इसलिए रिकमंड करते हैं, क्योंकि इनका असर बहुत तेजी से होता है। कुछ समय के लिए इससे अनिद्रा और तनाव में आराम मिलता है। जेड-ड्रग्स हिप्नोटिक सेडेटिव हैं, जो बेंजोज की तरह ही काम करते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा चर्चित जोल्पिडेम, जोपिक्लोन और जेलप्लॉन हैं। इस बात के प्रमाण और ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं कि नींद के लिए ली जाने वाली पॉवरफुल दवाइयां खतरनाक हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि ये दवाएं इतनी खतरनाक हैं कि इनसे लोगों की असमय मृत्यु भी हो सकती है।

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