बागेश्वर के 18 आपदा प्रभावितों गांवों को पुर्नवास का इंतजार

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बागेश्वर। बागेश्वर में 18 आपदा प्रभावित गांवों को पुर्नवास का इंतजार है। करीब 237 परिवारों के पास अपनी छत नहीं है। बारिश होने के बाद वे पुराने घरों को छोड़ देते हैं। अलबत्ता प्रशासन ने अभी तीन गांवों के लिए भूमि चयन की है। लेकिन उन्हें बसाने की कवायद अभी शुरू नहीं हो सकी है।
भूकंप और भूस्खलन की दृष्टि से जिला जोन पांच में आता है। भू-वैज्ञानिकों की टीम यहां कई बार जांच को आ भी गई है। रिपोर्ट राज्य से केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। लेकिन सालों से पुर्नवास का इंतजार कर रहे 18 गांवों के प्रभावितों के पास अभी भी छत नहीं है। करीब 237 परिवारों को पुर्नवास के लिए चयन भी किया गया है। जून और जुलाई महीना बारिश का माना जाता है। ऐसे में आपदा पीडि़तों को फिर से एक अदद छत की जरूरत होगी। वे काफी चिंतित हैं। हालांकि वर्तमान में अपने पुराने घरों में रह रहे हैं। जबकि कुंवारी का हाल इतर है। वहां करीब 18 परिवारों ने घर छोड़ दिए हैं। जिला प्रशासन उन्हें तीन हजार रुपये के हिसाब से किराया भी मुहैया करा रहा है। लेकिन अन्य प्रभावितों को सरकार की तरफ से अभी तक धेला भी नहीं मिल सका है।
सरकार ने दोबाड़, बड़ेत और सेरी गांवों के विस्थापन के लिए भूमि चयन कर ली है। यहां के लोगों के लिए धनराशि भी स्वीकृत हो गई है। लेकिन अभी तक मकान नहीं बन सके हैं। यह प्रभावित अभी भी पुराने घरों में रहने को मजबूर हैं।
कुंवारी, लीती, बघर, कर्मी, सीरी, नौकोड़ी, गैरखेत, बमसेरा, बाछम, किलपारा, तोली, लामाधार, गुमठी, कालपैर-कापड़ी, पोथिंग, स्यूड़ी-दलाड़ी आदि गांवों के लिए भूमि का अभी तक चयन नहीं हो सका है। आपदा प्रभावित 18 गांवों में वर्ष 2०1० और वर्ष 2०13 में तबाही हुई। घरों में दाररें पड़ गईं थी। खेल-खलिहान तक तबाह हो गए थे। लोगों ने तब भागकर अपनी जान बचाई थी।(आरएनएस)

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