यह कड़वाहट ठीक नहीं

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अमेरिका के करीब साढ़े तीन सौ अखबारों ने गुरुवार को संपादकीय लिखकर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के मीडिया विरोधी बयानों की आलोचना की। इन अखबारों ने प्रेस की आजादी की रक्षा करने का वादा भी किया। ट्रंप ने हाल में कुछ मीडिया विरोधी टिप्पणियां की थीं, जो मीडिया संस्थानों को नागवार गुजरी थीं। तमाम संस्थाओं ने इस पर अपना विरोध प्रकट करने के लिए अमेरिकी प्रेजिडेंट के खिलाफ सामूहिक रूप से संपादकीय लिखने का फैसला किया।
इसकी अगुआई बॉस्टन ग्लोब नाम के अखबार ने की। शुरू में 1०० अखबार इसके साथ आए और संपादकीय लिखने के लिए 16 अगस्त की तारीख तय की गई। लेकिन 16 तारीख आते-आते 343 अखबार इस मुहिम से जुड़ गए। ये अखबार मिलकर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पूरे 5० राज्यों को कवर करते हैं। बोस्टन ग्लोब ने अपने संपादकीय में ट्रंप पर आरोप लगाया कि वह प्रेस की आजादी पर लगातार हमला कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि किसी खबर को कम या ज्यादा महत्व देने या किसी खबर में गलती होने की निंदा करने का सबको अधिकार है। रिपोर्टर और संपादक भी इंसान हैं और गलती कर सकते हैं। इन्हें सुधारना हमारा मुख्य काम है। लेकिन जिसे आप पसंद नहीं करते, उसे फेक न्यूज कहना लोकतंत्र के लिए गलत है। असल में ट्रंप ने कुछ खबरों को फेक न्यूज बताया था। उसके बाद कुछ पत्रकारों से बदसलूकी की घटनाएं भी घटीं जिससे मीडिया में यह धारणा बनी कि पत्रकारों से गलत व्यवहार करने वालों को ट्रंप की शह मिल रही है। बहरहाल कार्यपालिका और मीडिया में यह अविश्वास अच्छी बात नहीं है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। अमेरिकी जनतंत्र ने पूरे विश्व को रोशनी दिखाने का काम किया है। वहां नागरिकों को अभिव्यक्ति की जितनी स्वतंत्रता मिली हुई है, उसे पाना अनेक देशों का सपना है। यही बात मीडिया के लिए भी कही जा सकती है। वहां प्रेस की जो हैसियत है, वह अब भी अनेक मुल्कों में मीडिया को नहीं हासिल हो सकी है। अमेरिका जिन चीजों के लिए विश्व का आदर्श है, उनमें उसका मीडिया भी है। ऐसा नहीं माना जा सकता कि ट्रंप को ये बातें मालूम नहीं हैं या वे इन चीजों की परवाह नहीं करते। प्रेस की कुछ चीजों से उनकी नाराजगी जरूर हो सकती है, लेकिन प्रेस की स्वतंत्रता का किसी तरह से हनन हो, ऐसी मंशा उनकी भी नहीं होगी। सबसे बड़ी बात यह कि जिन नागरिकों ने उन्हें चुना है और सिर-आंखों पर बिठाया है, वे भी नहीं चाहेंगे कि मीडिया पर किसी तरह की बंदिश लगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि राष्ट्रपति और मीडिया के बीच जो भी गलतफहमी पैदा हो गई है वह जल्द ही दूर कर ली जाएगी और रिश्तों की यह कड़वाहट खत्म होगी।(आरएनएस)

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