अपने ही बयान पर फंसे कुंजवाल

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अब बता रहे है अपनी जान को खतरा

हमारे संवाददाता
देहरादून। 2016 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार को गिराने के लिए भाजपा द्वारा सौ करोड़ और मुख्यमंत्री पद का लालच दिये जाने के अपने बयान को लेकर पूर्व स्पीकर गोविंद कुंजवाल खुद फंसते नजर आ रहे है। भाजपा द्वारा नामों का खुलासा करने की मांग को लेकर किये जा रहे सवालों पर कुंजवाल का कहना है कि अगर उन्होने नाम बताये तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।
कांग्रेस के अन्दर जारी अंर्तकलह के बीच अपने आप को सबसे ईमानदार और कांग्रेस का कर्मठ सिपाही साबित करने के लिए पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने अभी दो दिन पूर्व मीडिया में जो बयान दिया था उसमें वह खुद ही फंसते नजर आ रहे है। कुंजवाल ने कहा था कि 2016 में हरीश रावत की सरकार को गिराने में सहयोग करने के लिए उन्हे भाजपा के कुछ लोगों ने सौ करोड़ रूपये देने की पेशकश की थी। उन्होने यह भी कहा था कि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नौ विधायकों की सदस्यता बरकरार रखने के बदले में उन्हे मुख्यमंत्री बनाने की आफर भी दी गयी थी। उनके इन आरोपों पर भाजपा द्वारा यह सवाल उठाया गया है कि कुंजवाल तीन साल तक चुप क्यों रहे। उन्होने तीन साल बाद अब इसका खुलासा क्यों किया है। वहीं भाजपा उनसे पूछ रही है कि वह उन्हे प्रस्ताव देने वालों का नाम बताये। लेकिन कुंजवाल को अब इन सवालों का जवाब देते हुए नहीं बन रहा है।
बात सिर्फ भाजपा की नहीं है। कांग्रेस के अन्दर भी कुंजवाल के द्वारा किये गये इस खुलासे को लेकर कई सवाल उठ रहे है। अधिकांश लोग इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी से जोड़कर देख रहे है। भाजपा और कांग्रेेस दोनों के ही निशाने पर कुंजवाल है अब वह इन सवालों से बचने के लिए कह रहे है कि चार पांच लोग उनके पास यह प्रस्ताव लेकर आये थे लेकिन वह उनका नाम नहीं बता सकते क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।

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