अमेरिका में पढ़ाई

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पढ़ाई करने और करियर बनाने के इरादे से अमेरिका गए भारतीय और अन्य बाहरी छात्रों की चिंताएं अब और बढऩे वाली हैं। अमेरिकी सरकार ने उनके लिए जो फाइनल पॉलिसी गाइडलाइंस जारी की हैं, उनके मुताबिक उनके अमेरिका में रहने की समय-सीमा खत्म न हुई हो तो भी वे अवैध प्रवास के दोषी माने जा सकते हैं। इन नए प्रावधानों के मुताबिक किसी छात्र या छात्रा का ‘स्टूडेंट स्टेटस’ किसी भी वजह से हटता है तो अमेरिका में उनका रहना गैरकानूनी माना जाएगा और उनके अवैध प्रवास के दिनों की गिनती उसी समय से शुरू हो जाएगी। अब तक लागू व्यवस्था के मुताबिक यह गिनती तब शुरू होती थी जब उल्लंघन साबित होता था, या इमीग्रेशन जज ऐसा आदेश पारित करता था।
यह गिनती इस लिहाज से अहम है कि अगर किसी व्यक्ति की 18० दिनों की अवैध मौजूदगी दर्ज हो जाती है तो अमेरिका में उसके दोबारा प्रवेश पर तीन से दस साल तक का बैन लग जाता है। यानी अमेरिका में करियर बनाने का किस्सा ही खत्म। इसमें बहुत ज्यादा गुंजाइश इस बात की है कि किसी स्टूडेंट को उसकी गलती के बगैर ही सजा मिल जाए। ‘स्टूडेंट स्टेटस’ हटने की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें संस्थान द्वारा डेटा एंट्री में हुई मानवीय गड़बडिय़ां भी शामिल हैं। अब तक ‘स्टूडेंट स्टेटस’ के ऐसे उल्लंघन से छात्रों को ज्यादा नुकसान नहीं होता था क्योंकि ये प्रक्रियागत अड़चनें समय रहते दूर कर ली जाती थीं। मगर अब तो अनजाने में भी हुआ ऐसा कोई उल्लंघन 18० दिनों की लाइफलाइन को खाना शुरू कर देगा।
ध्यान रहे, अमेरिका में पढ़ रहे स्टूडेंट्स में चीनियों के बाद सबसे ज्यादा भारतीय ही हैं। इन भारतीय स्टूडेंट्स और उनके पैरंट्स के सिर पर अब हमेशा यह तलवार लटकी रहेगी कि कोई छोटी सी गलती, या किसी तरह की गलतफहमी, या संस्थान के किसी कर्मचारी की ही कोई भूल उनके लिए भारी न पड़ जाए। ताजा प्रसंग भले नई गाइडलाइंस का हो, पर मसला इसी तक सीमित नहीं है। असल सवाल उस राजनीतिक दृष्टि का है जो ऐसे बदलावों के पीछे है।
ट्रंप प्रशासन के नजरिये के मुताबिक दूसरे देशों से आने वाले सारे लोग अमेरिका पर बोझ हैं, वहां के स्थानीय निवासियों को इनके आने का नुकसान झेलना पड़ता है। इसीलिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ के नारे के तहत ऐसी नीतियां बनवाने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे अमेरिका आने की इच्छा रखने वाले लोग, खासकर नई पीढ़ी वाले इससे बाज आएं। मगर आज की खुली दुनिया में लोगों का आना-जाना हर देश के लिए फायदेमंद होता है। कहीं से आने वाले लोग नए देश में रोजी-रोटी कमाते हैं तो साथ में वहां की अर्थव्यवस्था और समाज में कुछ जोड़ते भी हैं। इस तथ्य को अनदेखा करने वाली दृष्टि दुनिया को संकीर्ण बनाएगी और देर-सबेर सबके लिए नुकसानदेह साबित होगी। जिस अमेरिका का सारा राई-रत्ती प्रवासियों का ही जोड़ा हुआ है, वही इस बात को नहीं समझ रहा, फिर उम्मीद किससे की जाए?

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