मान्यता रद होने के बाद तेज हुई सियासत

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हल्द्वानी। उत्तराखंड विश्वविद्यालय में 72 विषयों की मान्यता रद होने के बाद सियासत तेज हो चुकी है। मामले में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने यूओयू के ढांचे को कमजोर करने व पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं दिला पाने के लिए राज्य सरकार की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि वह मामले को जल्द ही विधानसभा में उठाएंगी। उत्तराखंड के उच्चशिक्षा मंत्री ने बताया कि मामले को लेकर वह स्वयं यूजीसी के चेयरमैन से मुलाकात करेंगे, जिसमें विश्वविद्यालय की ओर से सभी पाठ्यक्रमों को मान्यता दिलाने के लिए प्रत्यावेदन दिया जाएगा।
यूओयू में पाठ्यक्रमों की मान्यता रद किए जाने के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य व केन्द्र की भाजपा सरकार सरकारी विश्वविद्यालयों व ओपन यूनिवर्सिटी के ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहती है। इसके लिए यूजीसी का सहारा लिया जा रहा है। यूजीसी के माध्यम से सरकारी विश्वविद्यालयों के 8० फीसदी तक पाठ्यक्रमों की मान्यता को रद कर दिया गया है, जबकि निजी विश्वविद्यायों के पाठ्यक्रमों को दिल खोलकर मान्यता दी जा रही है। उन्होंने कहा है कि यूओयू के पाठ्यक्रमों की मान्यता रद करने से व्यक्तिगत रूप से परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इस मामले को वह जल्द ही विधानसभा में उठाएंगी।
उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि यूओयू के पाठ्यक्रमों को रद किए जाने के मुद्दे को सरकार ने गंभीरता से लिया है। मामले में उन्होंने स्वयं केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और यूजीजी के चेयरमैन प्रो.डीपी सिंह से वार्ता की है। दोनों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। साथ ही प्रदेश के राज्यपाल के स्तर से भी यूजीसी के चेयरमैन से वार्ता की गई है। यूजीसी ने यूओयू को अपना पक्ष रखने के लिए एक माह का समय दिया है। मामले में जल्द ही यूजीसी के समक्ष पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर प्रत्यावेदन दिया जाएगा।
देशभर के मुक्त विश्वविद्यालयों में तमाम पाठ्यक्रमों की मान्यता रद करने को लेकर पड़ रहे राजनैतिक दबाव के बाद यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन बैकफुट पर आ गया है। 9 अगस्त को देश के तमाम मुक्त विश्वविद्यालयों के 7० से 8० फीसदी तक पाठ्यक्रमों की मान्यता रद करने का आदेश देने वाले यूजीसी ने अपनी वेबसाइट पर मामले को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। यूजीसी के सचिव की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि 9 अगस्त को जारी किए गए पाठ्यक्रमों को रद करने के फैसले को अंतिम नहीं माना जाए। मामले में यूजीसी मान्यता रद करने को लेकर मुक्त विश्वविद्यालयों की कमियों को 16 अगस्त को उजाकर करेगी। इसके बाद विश्वविद्यालयों के पक्ष को सुना जाएगा। उन्हें अपना पक्ष रखने व पाठ्यक्रमों को फिर से मान्यता दिलाने के लिए एक माह का समय दिया जाएगा। इसके बाद पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। राज्य में व्यक्तिगत परीक्षा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके चलते मुक्त विश्वविद्यालय और इग्नू के माध्यम से हर वर्ष तमाम पाठ्यक्रमों और पीजी तथा यूजी की डिग्री के लिए कुमाऊं और गढ़वाल में करीब 3 लाख विद्यार्थी परीक्षा देते हैं। यूओयू और इग्नू के पाठ्यक्रमों की मान्यता पर विचार नहीं किया गया तो राज्य में व्यक्तिगत रूप से परीक्षा में शामिल होने वाले इन छात्रों का भविष्य अंधेरे में पड़ जाएगा।(आरएनएस)

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