शेल्टर होम या अय्याशी के अड्डे

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बिहार के मुजफ्रफरनगर और उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ और देवरिया के शेल्टर होम (बाल एवं महिला सरंक्षण गृह) में नाबालिग बच्चियों और महिलाओं के यौन शोषण की जो घटनाएं सामने आई है। वह न सिर्फ चिंतनीय और निंदनीय है अपितु मानवता के माथे पर कलंक टीका है। अब मध्यप्रदेश की राजधानी से भी मूक बधिर बालिकाओं और महिलाओं के साथ दरिंदगी की खबरें आ रही है। दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओेें के लिए चलाये जाने वाले इस ट्रेनिंग सेंटर के संचालक को पुलिस ने गिरफ्रतार किया है। देशभर में सरकारी सहायता से चलने वाले इन सरंक्षण गृहों और ट्रेनिंग सेंटरों में बच्चियों महिलाओं के यौन उत्पीड़न मामले पहली बार प्रकाश में नहीं आये है। अनाथ, दिव्यांग और बेसहारा लाचार बच्चियों और इन महिलाओें को सरंक्षण तथा ट्रेनिंग देने के नाम पर चलने वाला यह घिनौना खेल लंबे समय से जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार जो मामले सामनेे आये है उनका स्तर अत्यन्त व्यापक है। बिहार के शेल्टर होम में रहने वाली चालीस से अधिक बच्चियों के साथ दुराचार की पुष्टि हो चुकी है वहीं उत्तरप्रदेश के देवरिया शेल्टर होम से 26 महिलायें गायब हैं। खास बात यह है कि इन शेल्टर होम के संचालकों की सत्ता में गहरी पकड़ है। अपने ऊंचे रसूखों के कारण इनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं होता। अगर कोई अधिकारी थोडी बहुत सख्ती दिखाता है तो यह संचालक उसके सामने भी इन लड़कियों को किसी व्यंजन की तरह परोस देते हैं। पुलिस के साथ भी इनकी सांठ गांठ होेती है। देशभर चलने वाले लाखों बाल और महिला सरंक्षण गृहों को न सिर्फ सरकारी मदद मिलती है बल्कि देश विदेश से तमाम तरह की आर्थिक सहायता मिलती है। यहीं कारण है कि समाज सेवा का चोला ओढ़कर शेल्टर होम संचालक बने यह लोग सरकारी पैसे पर ऐश मौज के अड्डे खोले बैठे हैं। ऐसे एनजीओ को सरकार द्वारा तुरंत बन्द कर दिया जाना चाहिए जो अÕयाशी का अड्डा बन चु के हैं और लोगों ने इन्हें चकलाघर बना रखा है। बीते कल सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी सरकार से पूछा गया है कि आखिर इन शेल्टर होम में होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है अब रोका जा सकेगा। दरअसल यह हमारे सिस्टम का वह कुरूप चेहरा है जिसकी तरह देखने और उससे आंखें मिलाने का साहस सत्ता में बैठे लोगों का नहीं है। बिहार के नेता जो सत्ता से बाहर वह इस मुद्देे को लेकर जंतर मंतर तक पहुंच गये। मुख्यमंत्री नितिश कुमार और योगी आदित्यनाथ ने कहा हम शर्मिंदा हैं और कानून अपना काम करेगा। सवाल यह है कि हमारे नेता किस कानून की बात करते हैं और अगर सब काम कानून ने ही करना है तो वह सत्ता में क्यों बैठे है? कानून तो ढ़ेर सारे है अगर कानून अपना काम करता तो एक भी अपराधी अपराध करने का साहस नहीं कर सकता था। हम सिर्फ शर्मिंदा हो सकते हैं इसलिए सिर्फ शर्मिंदा होते रहते हैं।

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