मेले के बाद धर्मनगरी हुई कूड़ा-कूड़ा

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प्रशासन सफाई व्यवस्था में हुआ फेल
संक्रामक रोगों की आशंका से लोग भयभीत

हरिद्वार। करोड़ों की संख्या में श्रद्वालुओं के तीर्थ नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचने से भले ही सत्ता में बैठे लोग और स्थानीय व्यापारी खुश हों लेकिन 10 दिन चले कांवड़ मेले के बाद यहां लगे कूड़े के अंबार को साफ करना स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया हैै। शहर में फैले इस कूड़े को साफ करने के लिए अब प्रशासन द्वारा स्वयंसेवी संस्थाआेंं से अपील की जा रही है।
कांवड मेले के समाप्त होने पर हरिद्वार और ऋषिकेश की यह तस्वीर सामने आई है वह अत्यन्त ही भयावह है। सड़क, गली, मोहल्ले, पार्क और मैदानों से लेकर सभी घाटों पर कूड़े कचरे और गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। एक अनुमान के अनुुसार हरिद्वार में 5000 मैट्रिक टन कूड़ा फैला पड़ा है जिसे साफ कर पाना नगर निगम के बस में नही दिख रहा है। इस बार कांवड मेले में साढ़े 4 करोड़ कांवडियों के आने की बात कही जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मेले के समय भीड़ के बीच सफाई संभव नही थी जिसके कारण इतनी भारी मात्र में कूड़ा जमा हो गया है। खास बात यह है कि अब बरसात का मौसम यह कूड़ा सड रहा हैै पर्याप्त कूड़ेदानों और शौचालयों की व्यवस्था न होने के कारण गंदगी इस हद तक फैल गई है कि लोगों का घरों से बाहर निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
नगर आयुक्त और एडीएम अब स्वयंसेवी संस्थाओं और स्कूली बच्चों से सफाई व्यवस्था में सहयोग की अपील कर रहे हैं लेकिन कितनी भारी मात्र में जमा इस कूड़े कचरे को साफ करना कोई आसान काम नही है। चौतरफा फैली इस गंदगी के कारण संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका से लोग भयभीत हैं।

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