1971 से पहले के दस्तावेज दिखाने पर एनआरसी में नाम आ जाएगा: गृहमंत्री

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नई दिल्ली। असम के एनआरसी मुद्दे पर मचेे सियासी घमासान पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि एनआरसी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में जो लोग छूट गए हैं, उनके खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह ४० लाख परिवार नहीं हैं, बल्कि ये व्यक्तियों की संख्या हैै। उन्होंने साफ किया कि एनआरसी में कोई भेदभाव ना तो हुआ है और ना ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिसे एनआरसी में नाम जुड़वाना है उसे सर्टिफिकेट पेश करना होगा। एनआरसी को लेकर हम शांति और सौहार्द बनाकर रखेंगे। १९७१ से पहले के दस्तावेज दिखाने पर एनआरसी में नाम आ जाएगा। मामले में अनावश्यक डर फैलाने की कोरिश की गई है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी की प्रक्रिया १९८५ में असम समझौते के जरिये तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में शुरू हुई थी। इसको अपडेट करने का निर्णय २००५ में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में पूरी की गई है। उन्होंने कहा मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि यह अंतिम मसौदा है, अंतिम सूची नहीं है। सभी लोगों को अपील कररने का मौका मिलेगा। यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है।

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