असम में 40 लाख लोगों की नागरिकता पर लटकी तलवार!

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नई दिल्ली। असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे और अंतिम ड्राफ्ट को जारी कर दिया गया है। रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक, ३.२९ करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें २.८९ करोड़ वैध नागरिक पाए गए हैं, जबकि ४० लाख लोग नागरिकता से बाहर हो गए हैं। हालांकि उन्होंने कहा है कि जिनका नाम इस ड्राफ्ट में नहीं है, वो परेशान ना हों, फिर से आवेदन कर इस रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
यह ड्राफ्ट सुबह १० बजे राज्य के सभी एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके) सहित ऑनलाइन भी प्रकाशित किया गया है। इसे देखते हुए राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एनआरसी स्टेट कोऑर्डिनेटर ने बताया कि एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ हैं जो २५ मार्च, १९७१ से पहले से असम में रह रहे हैं।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुददे पर कहा, कुछ लोग बिना वजह ही इस लिस्ट के आधार पर भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है। कोई भी भ्रामक जानकारी नहीं फैलाई जानी चाहिए। यह कोई फाइनल लिस्ट नहीं बल्कि ड्राफ्ट है।
असम और पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा चुस्त-दुरुस्त रखने के लिये केन्द्र ने सीआरपीएफ की २२० कंपनियों को तैनात किया है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एनआरसी ड्राफ्ट पर आधारित किसी मामले को विदेश न्यायाधिकरण को नहीं भेजें।
मसौदा जारी होने के बाद एनआरसी के राज्य समन्वयक की ओर से कहा गया है कि यह मसौदा अंतिम लिस्ट नहीं है, जिन लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, इस पर अपनी आपत्ति और शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एनआरसी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने संसद में स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की है। वहीं आरजेडी ने इस पर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
एनआरसी मसौदे को लेकर पूरे राज्य में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए हैं थे।

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