ज्वालापुर के मुस्लिम समुदाय द्वारा तैयार की जा रही कांवड़

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हरिद्वार। शिवभक्त कांवडि़यों के लिए दो माह से लगातार उपनगरी ज्वालापुर में भव्य सुंदर कांवड़ तैयार की जा रही हैंंं। कांवड़ मेले के मद्देनजर ज्वालापुर के विभिन्न मौहल्लों में मुस्लिम समाज की महिला पुरूष सुंदर कांवड़ को तैयार करने में जुटे हुए हैं। एकता व भाईचारे तथा सौहार्द की मिसाल पेश की जा रही है। कांवड़ तैयार कर रही सलमा का कहना है कि दस वर्षो से लगातार शिव भक्त कांवडि़यों के लिए भव्य कांवड़ तैयार करती चली आ रही हैं। पूरा परिवार कांवड़ तैयार करने में सहयोग करता है। एक मंजिल कांवड़ का जौड़ा 18० रूपए में बिक जाता है।
एक कांवड़ को तैयार करने में एक घंटा लगता है। कांवड़ को भव्य रूप देने के लिए रंगीन कांगज, बेल बूटो से तैयार कर शिव भक्तों के लिए बिक्री के लिए कांवड़ बाजार में सजायी जाती है। महंगाई के कारण कांवड़ तैयार करने में काफी परेशानियां भी उठानी पड़ती हैं। अधिकांश कांवड़ पांच मंजिल तक ही बनाई जाती हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन के निर्देशों को देखते हुए अधिक बड़ी कांवड़ नहीं बनायी जा रही है। कांवड़ बनाने के रोजगार से प्रति वर्ष ठीक ठाक आमदनी हो जाती है। परिवार का गुजर बसर करने में कोई परेशानी नहीं आती है। मेला नजदीक होने के चलते काम का अधिक दबाव है। क्योंकि कांवड़ बाजार में कांवड़ों को सजाना पड़ता है। देश के कोने कोने से कांवडि़एं कांवड़ में जल भरकर अपने गंतव्यों की और रवाना होते हैं। शम्मून, छोटा, टोनी, फरजाना, मुख्तयार सभी मिलजुलकर कांवड़ को भव्य रूप प्रदान करने में अपना सहयोग प्रदान करते हैं। शकीना का कहना है कि उपनगरी ज्वालापुर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कांवड़ को तैयार करते चले आ रहे हैं। दो जून की रोटी इस कामकाज से मिल जाती है। पूरा परिवार कांवड़ मेले के शुरू होने से पूर्व ही रातदिन कांवड़ तैया करने में जुट जाता है। रोजगार से किसी धर्म या समुदाय का कोई लेना देना नहीं होता है। प्रतिवर्ष कांवड़ तैयार करने वाले कारीगरों को धर्मनगरी में कांवडि़यों की आमद का बेसब्री से इंतजार रहता है। प्रतिवर्ष भव्य कांवड़ तैयार कर भगवान भोले के भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए कांवडि़एं कांवड़ में जल भरकर ले जाते हैं।

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