घर भी लुटा और सर भी पिटा

0
704

देहरादून। घर का घर लुटा और सर का सर पिटा, यह कहावत इन दिनों राजधानी दून के व्यापारियों और दुकानदारों पर सौ फीसदी चरितार्थ हो रही है। भाजपा को सहयोग राशि (चंदा)के तौर पर लाखों लाख रूपये देने वाले दुकानदार और व्यापारी अब अपनी दुकान, मकान, होटल और ढावों को तोड़े जाने पर स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
अभी चंद महीने पहले की ही तो बात है जब प्रदेश भाजपा ने राज्य में चंदा जुटाओं अभियान चलाया था। कद के हिसाब से सभी नेताओं द्वारा पार्टी के लिए चंदा जुटाया था तथा अभियान की समाप्ति पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट द्वारा बडे़ गर्व के साथ यह जानकारी दी गयी थी कि वह लक्ष्य से भी अधिक, 25 करोड़ की सहयोग राशि जुटाने में सफल हो गये हैं। उन्होंने अपने उन नेताओं की भी पीठ थपथपाई थी जिन्होंने चंदा जुटाने में अपेक्षा से अधिक धन जुटाया था। हो सकता है पार्टी उन्हें कोई पद और दायित्व देकर उपकृत भी कर दे, लेकिन सवाल यह है जिन दुकानदारों, व्यापारियों ने अपनी खून पसीने की कमाई से लाखों रूपये अंशकालीन या आजीवन सहयोग राशि के रूप में दिए उन्हें क्या मिला? पहले जीएसटी के दायरे में लाकर उनके व्यवसाय व कारोबार की कमर तोड़ी गयी जिसे लेकर वह अब तक परेशान हैं और अब अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनकी दुकानों, गोदामों और घरों को तोड़ा जा रहा है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इन व्यापारियों द्वारा भाजपा को जो सहयोग राशि के नाम पर मोटा चंदा दिया गया था वह उनकी कोई नम्बर दो की कमाई या कालाधन नहीं था यह उनकी नम्बर एक की कमाई थी जिसे उन्होंने चैकों के माध्यम से भाजपा को दिया था। इनमें ऐसे अनेक व्यापारी और दुकानदार थे जिन्होंने लाखों में सहयोग दिया 25 करोड़ , कोई दस-बीस-पचास रूपये के योगदान से नहीं जुट सकता था। अब स्थिति यह है कि वह भाजपा नेता जिन्होंने इन व्यापारियों व दुकानदारों से मोटा चंदा लिया था कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। व्यापारी अब इन्हें खोजते फिर रहे हैं और उनसे यह पूछ रहे हैं यह क्या करा रहे हो।
किसी की दुकान तोड़ी जा रही है तो किसी का शोरूम, किसी का होटल तोड़ा जा रहा है तो किसी का ढ़ाबा, हर रोज जेबीसी अतिक्रमण हटाने के नाम पर इन व्यापारियों को उजाड़ा जा रहा है लेकिन उनकी मदद करने वाला अब कोई दिखाई नहीं दे रहा है न वह विधायक जिन्हें अपना वोट देकर जिताया था और न वह नेता जिन्हें लाखों का चंदा दिया था। अगर विरोध करते हैं तो फिर पिटने का डर है इसलिए सब कुछ सिर्फ सहना है ऐसा ही कुछ हाल है दून के दुकानदारों व व्यापारियों का इन दिनों।

LEAVE A REPLY