हरि की नगरी में भाजपा में बनने लगे हैं कई गुट

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हरिद्वार। सत्ता का नशा किस कदर बोलता है यह देखना है तो प्रदेश के सर्वाधिक विधानसभा क्षेत्रों वाले हरिद्वार जिले में भाजपा की स्थिति पर नजर डालें। यहां इस समय धड़ेबाजी पार्टी संगठन और सरकार दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी करती नजर आ रही है। 2०14 के लोकसभा चुनाव के बाद से यहां पार्टी तीन ध्रुवों में बंटी दिखाई देती है। माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी विधायक समय-समय अपनी ही सरकार और संगठन के खिलाफ बयानबाजी करते आ रहे हैं। लक्सर विधायक संजय गुप्ता का मुख्यमंत्री और सरकार को निशाने पर लेने वाला ताजा विवादित बयान इसकी बानगी मात्र है। इससे पहले भी कई मौकों पर विधायकों के आचरण और बयानबाजी ने सरकार व संगठन के लिए परेशानियां खड़ी की हैं।
हरिद्वार में भाजपा हमेशा से दो गुटों में बटी रही है। 2०14 लोकसभा चुनाव के वक्त सतपाल महाराज के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने और सरकार बनने पर हरिद्वार का प्रभारी मंत्री बनने से इसमें एक और धड़ा शामिल हो गया। पहले यह हरिद्वार विधायक मदन कौशिक बनाम अन्य विधायक हुआ करता थे, लेकिन 2०14 के लोस चुनाव में मदन कौशिक की जगह पूर्व सीएम डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक को टिकट मिलने पर कौशिक खेमे के खुलकर विरोध करने से निशंक खेमा भी इसमें शामिल हो गया। पर्दे के पीछे दोनों में एक-दूसरे को शह और मात देने की चालें उसी समय से चली जाने लगी। अभी तक मदन कौशिक खेमे से नाराज चल रहे बाकी विधायक भी सांसद खेमे में शामिल हो गए। वर्ष 2०16 में हरिद्वार में हुए जलभराव के वक्त मदन कौशिक खेमे के माने जाने वाले हरिद्वार मेयर मनोज गर्ग पर सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम के खिलाफ हुई कार्रवाई के दौरान हुए हमले से सतपाल महाराज गुट भी उनके खिलाफ हो गया। परिस्थितियां भांपकर सांसद और महाराज खेमों ने एक दूसरे से हाथ मिला लिया। इस मामले में दोनों ने एक साथ प्रदेश से लेकर दिल्ली तक कौशिक खेमे की खुलकर खिलाफत की।

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