फुस्स होता अतिक्रमण हटाओ अभियान

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देहरादून। भले ही अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश का यह कहना हो कि अतिक्रमण हटाओ अभियान में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन अब धीरे-धीरे इस महाअभियान की गति मंद पड़ती जा रही है कारण चाहे दून में हो रही ताबड़तोड़ बारिश हो या फिर अभियान का विरोध और प्रशासनिक टीमों के उत्साह की कमीं, लेकिन यह सच है कि जिस गति के साथ शासन-प्रशासन द्वारा यह महाअभियान शुरू किया गया था उसकी गति अब मंद होता जा रहा है।
खास बात यह है कि हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए जो चार सप्ताह का समय दिया गया था उसमें दस प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हो सकेगा। इसलिए सरकार ने अदालत से और अधिक समय मांगने का मन बना लिया है। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पहले चार दिन इसी बात में गुजार दिये थे उन्हें अभी कोर्ट के आदेश नहीं मिल सके हैं और जब काम शुरू किया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश आ गये जिनका अध्ययन करने में दो दिन का समय लग गया इस दौरान इस अभियान पर दो दिन काम बंद रहा। उसके बाद 17 जुलाई को राजधानी में बादल फट गया जिसके कारण दो दिन पूरा प्रशासनिक अमला आपदा का के राहत कार्यों में जुटा रहा जिसके कारण ध्वस्तीकरण का काम पूरी तरह ठप रहा। सिर्फ चिन्हीकरण का ही काम हो सका।
इसमें कोई शक नहीं है कि लगातार हो रही बारिश अतिक्रमण अभियान में बाधा डाल रही है। बीते कल भी सिर्फ एक जोन में ही ध्वस्तीकरण का काम चल सका बाकी तीन जोन में काम बंद रहा। आज भी बारिश के कारण काम बाधित हुआ। अब तक दून के सिर्फ प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण हटाने का काम हो सका है। जितने क्षेत्रें में काम हुआ है उससे तीन गुना क्षेत्र अभी बाकी हैं। इस अभियान में कुछ व्यवहारिक दिक्कते भी आ रही हैं। खासकर चिन्हीकरण प्रक्रिया से लोग असहमत हैं जिसका पल्टन बाजार और प्रेमनगर सहित कई क्षेत्रें में विरोध भी हो रहा है। भले ही अब तक प्रशासन 4 हजार से अधि क अतिक्रमण चिन्हित कर चुका है तथा डेढ़ हजार के आसपास अतिक्रमण तोडे़ जा चुके हैं लेकिन जिस गति से अभियान चल रहा है उससे साफ है कि इसमें कई महीने का समय लगेगा। यही कारण है अब सरकार आपदा राहत कार्यों का हवाला देकर इसकी समय सीमा बढ़ाने के लिए कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।

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