पहाड़ पर मौत से जिंदगी की जंग

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देहरादून। मानसून की पहली ही बरसात में पहाड़वासियों के जनजीवन को तहस-नहस कर दिया है। पहाड़ों से खिसकते पत्थर और मलबा तो कहीं उफनती नदियाें का तांडव तो कहीं सड़क और संचार संपर्क ध्वस्त होने से पहाड़वासियों को जिंदगी की रक्षा के लिए मौत से जंग लड़नी पड रही है।
पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी में बादल फटने की घटनाओं से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। दर्जनों गांवों पर संपर्क टूट गया है। वहीं व्यास नदी पर बने पुल के ढहने से लोगों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है । यहां फंसे कुछ लोगों को जेबीसी मशीन के सहारे इस पार से उस पार लाया गया। भूस्खलन के कारण तबाह हुई सड़कों के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रियों को एयर लिफ्रट किया जा रहा है। गोरी और काली नदियों के उफान पर होने के कारण लोग दहशत में हैं। बीते कल कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने क्षेत्र का हवाई निरीक्षण किया। और मदद की जरूरत भी बताई। यहां एक सरकारी हेली काप्टर लोगों की मदद के लिए लगाया गया है।
उधर जोशीमठ के उर्घम घाटी में बरसात से आए मलबे के कारण 70 स्कूली बच्चे रास्ते में फंस गऐ जिन्हें क्षेत्रवासियों ने रस्सियों के सहारे खतरनाक पहाड़ पर चढ़कर किसी तरह बचाया। कई स्थानों पर सड़कों के बंद होने से लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए पहाड़ों की खड़ी चढ़ाईयों पर चढ़ने का जोखिम उठा रहे हैं। एक तरफ गहरी खाईंयां और उफनती नदियां हैं तो दूसरी तरफ जान जोखिम में डालकर पहाड़ों का सफर तय कर रहे हैं। यह लोग मौत से जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे से यमनोत्री हाईवे बंद पड़ा है और दोनों तरफ सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं। सवाल यह है कि अभी यह मानसून की शुरूआत है। आगे क्या हाल होने वाला है इसे लेकर लोग भयभीत हैं। आठ जुलाई से 13 जुलाई तक मौसम विभाग ने एक बार फिर राज्य में भारी बारिश की संभावना जताई है।

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