कांग्रेस ने लगाया सीएम पर पक्षपात का आरोप

0
8

देहरादून। भले ही भाजपा हो नारा हो सबका साथ, सबका विकास लेकिन व्यवहार में भाजपा सरकार के कामकाज से तो ऐसा लगता है कि उसका मतलब सिर्फ अपना साथ-अपना विकास तक ही सीमित है। बीते कल सचिवालय से जारी समीक्षा सूची में सिर्फ उन्हीं 57 विधानसभा क्षेत्रें को शामिल किया जाना जहां से भाजपा विधायक जीतकर आए हैं से यहीं लगता है कि उनकी करनी और कथनी दोनों अलग-अलग हैं। कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के 13 विधानसभा क्षेत्रें के समीक्षा किए जाने के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री द्वारा सिर्फ भाजपा विधायकों के विधानसभा क्षेत्रें की समीक्षा करने और 13 विधानसभा क्षेत्रें को छोड़ देने पर चुटकी लेते हुए कहा है कि यह डबल इंजन की सरकार है जो अपनी सत्ता की ताकत दिखा रही है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं न कि केवल उन 57 विस क्षेत्रें के जहां से भाजपा जीती है। यह प्रदेश की जनता के साथ भेदभाव है। विकास को पूरे राज्य की जरूरत है और हर क्षेत्र के लोगों का हक है।
कांग्रेस की इस प्रक्रिया पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि यह परंपरा पूर्ववर्ती हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने शुरू की थी। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अपनी सरकार के समय भाजपा विधायकों के विधानसभा क्षेत्रें की समीक्षा नहीं करते थे और उन्होंने समीक्षा बैठक के लिए नहीं बुलाते थे। उधर भाजपा के प्रवक्ता का कहना है कि समय आने पर कांग्रेसी विधायकों के विधानसभा क्षेत्रें में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि बीते कल मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा विधानसभा क्षेत्रें की समीक्षा का जो कार्यक्रम सचिवालय से जारी हुआ है। उसमें से 57 उन विधानसभा क्षेत्रें को शामिल किया गया है जिनमें भाजपा के विधायक हैं। शेष 13 विधानसभा क्षेत्रें को छोड़ दिया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा इन विधानसभा क्षेत्रें की समीक्षा 7 जुलाई से 26 जुलाई तक की जाएगी। जिसमें वह वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए जिलाधिकारियों से विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

LEAVE A REPLY