कुछ सीन्स की शूटिंग के दौरान मैं सचमुच रो पड़ा था : रणबीर कपूर

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बॉलिवुड अभिनेता संजय दत्त की बायॉपिक संजू इसी महीने 29 जून को रिलीज़ द्दह्नड्र्ढं। फिल्म में संजय का किरदार रणबीर कपूर निभा रहे हैं। रणबीर के लिए संजू की सफलता बहुत ज्यादा मायने रखती है। इस दौरान हुई खास बातचीत में रणबीर ने संजू की जर्नी पर बात की।
जब संजू ऑफर हुई तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
जब राजू हिरानी ने मुझे पहली बार बताया कि वह संजय दत्त की बायॉपिक बना रहे हैं, तो मेरा रिऐक्शन यही था कि यार यह तो हो नहीं सकता। संजय दत्त आज भी इतने बड़े सुपर स्टार हैं और खूब काम भी कर रहे हैं, लोग उन्हें बहुत प्यार करते हैं। मैं कैसे कर पाऊंगा। उनकी जो 2० से लेकर 6० साल तक की उम्र है उसमें कैसे फिट बैठूंगा। ऐसे तमाम सवाल दिमाग में घूम रहे थे, लेकिन जब मैंने कहानी पढ़ी तब मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ गया।
कैसे शुरू की थी तैयारी?
यह कहानी इतनी दिलचस्प थी, जो ऐक्टर के तौर पर मुझे बहुत कुछ सिखा सकती थी। हमने शूटिंग से पहले इस फिल्म की तैयारी में 8 महीने का समय लिया। बॉडी बनाना, मेरे लुक पर प्रॉस्थेटिक मेकअप के प्रयोग, संजय दत्त के उठने-बैठने, चलने, बात करने के तरीकों, उनकी आवाज पर काम करना और वजन बढ़ाने-घटाने जैसे तमाम चीजों की तैयारी की। यह सब इतना आसान नहीं था। जब संजू की तैयारी शुरू की थी तब मेरा वजन 7० किलो था मुझे अपना वजन बढाकर 88 किलो करना पड़ा। इस तैयारी के समय मैं जग्गा जासूस भी कर रहा था।
बहुत सारे ऐसे सीन थे जिन्हे शूट करते समय मेरी आंखें भर आईं थी, लेकिन मैं दो ऐसे सीन चुनूंगा जहां पर सबसे ज्यादा इमोशनल हुआ था। पहला सीन जब उनकी (संजय दत्त) पहली फिल्म रॉकी का प्रीमियर चल रहा था और ठीक 2 दिन पहले उनकी मां का निधन हो गया था। वह ड्रग्स में बहुत ज्यादा इन्वॉल्व हो गए थे।
जब फिल्म चल रही थी तो लोग अंदर फिल्म देख रहे थे और वह बाहर सीढिय़ों में अपने पिता के साथ बैठकर उन्हें बता रहे थे कि पता नहीं मुझे क्या हो गया है, मैं ड्रग्स में बहुत ज्यादा घुस गया हूं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या सच है और क्या झूठ, यह सीन बहुत इमोशनल था। दूसरा सीन था जब सुनील दत्त साहब की डेथ हुई, तब संजय दत्त पर गुजर रही थी, जब वह अपने पिता की अर्थी लेकर जा रहे थे तो उनके दिमाग में क्या चल रहा था। इस सीन को बहुत ही प्यारे ढंग से राजू सर ने लिखा है, इस समय संजय दत्त अपने पिता को धन्यवाद बोल रहे थे।
फिल्म में 2 सीन थे जो सबसे मुश्किल थे, इस सीन्स को करते समय मैं सोचता था कि जब यह निभाते हुए मुश्किल लग रहे हैं तो असल जिंदगी में जिस पर बीते होंगे उस पर क्या गुजरी होगी। पहला मुश्किल सीन जब वह ड्रग्स में डूब जाते हैं और दूसरा जब जेल जाते हैं। इन दोनों सिचुएशन में कैसे और किस दिमागी हालत में उन्होंने अपनी जिंदगी होगी। मेरे लिए इन सीन्स में असल इमोशन भरना बेहद चैलन्जिंग हो गया था।

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