महिला फरियादी को फटकार पर घिरे सीएम

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देहरादून। बीते कल अपने जनता दर्शन में महिला फरियादी को फटकारने और उसके सस्पेंशन के आदेशों पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की चौतरफा निंदा हो रही है। शिक्षकों से लेकर बुद्धिजीवियों और आम आदमी तक मुख्यमंत्री के इस तरह के असंवेदनशील व्यवहार के लिए उन्हें दोषी ठहरा रहा है।
कल अपने जनता दर्शन कार्यक्रम में एक शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा की फरियाद पर और उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने के बजाय मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जिस तरह के आचरण का प्रदर्शन किया वह किसी भी गरिमामयी पद पर बैठे व्यक्ति के लिए शोभनीय नहीं कहा जा सकता है।
मुख्यमंत्री के इस तरह के आचरण व व्यवहार को लेकर जहां शिक्षक संगठनों व शिक्षकों में भारी आक्रोश है वहीं बुद्धिजीवियों द्वारा इस सत्ता की हनक बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जिस तरह से एक फरियादी की बात सुनते समय अपना आपा खोया व उनके प्रचण्ड बहुमत के नशे का ही परिणाम है। लोगों का कहना है कि अमित शाह द्वारा उन्हें अपना मित्र बताकर जो अभयदान दिया गया है यह उसी का गुरूर है। जिसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे त्रिवेन्द्र सिंह रावत पचा नहीं पा रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर अब सूबे की राजनीति में भी उबाल आ गया है। कांग्रेस जो कल तक दबी जुबान इसकी निंदा कर रही थी के साथ-साथ अब यूकेडी, बसपा और सपा व आप के नेता भी मुख्यमंत्री के इस तरह के व्यवहार की निंदा कर रहे हैं। यही नहीं कुछ राजनीतिक दलों ने तो इसे अपना राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।
उधर, जिला शिक्षाधिकारी ने बीते कल मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में अशोभनीय व्यवहार के लिए इसे कर्मचारी आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उनका निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा अपने पति की मौत के बाद एक साल से अवैतनिक अवकाश पर हैं। बीते कल हुई इस घटना के बारे में उनका कहना है कि आपा खोने पर अगर सवाल पूछना है तो मुख्यमंत्री से पूछो कि वह एक महिला फरियादी पर क्यों भड़के जब मुख्यमंत्री की टोन बदली और उन्होंने सस्पेंड करने की धमकी दी तो मैने भी कह दिया ठीक है कर दो सस्पेंड। कुल मिलाकर अपने ट्रांसफर की गुहार लेकर सीएम दरबार पहुंची उत्तरा बहुगुणा को ट्रांसफर तो नहीं मिला हां अब उनकों निलंबित जरूर कर दिया गया है।


मुख्यमंत्री को नहीं खोना चाहिए आपा: इन्दिरा
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मुद्दे पर अपनी ट्यूट में कहा है कि वह शिक्षिका के व्यवहार से सहमत नहीं हैं। लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह द्वारा जिस तरह का असंवेदनशील व्यवहार किया गया वह भी अत्यंत दुखद है। जनता दरबार में अपने लोगों को बुलाया है उनकी समस्याओं को संयम पूर्व सुनने के बजाय उन्हें फटकारना या फिर इन्हें गिरफ्रतार कर लो या इसे अभी सस्पेंड कर दो जैसे व्यवहार की उम्मीद किसी मुख्यमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति से नहीं की जा सकती। निश्चित रूप से यह अत्यंत दुखद है।
नेता विपक्ष इन्दिरा हृदयेश ने बीते कल मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में शिक्षिका के साथ किए गए असंवेदनशील व्यवहार पर उन्हें नसीहत देते हुए कहा गया है कि एक मुख्यमंत्री को इस तरह छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा नहीं खोना चाहिए। एक फरियादी की बातों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना जरूरी है।

फिर सीएम की पत्नी का कैसे हुआ तबादला
देहरादून। बीते कल जब मुख्यमंत्री उत्तरा बहुगुणा को नसीहत दे रहे थे कि उनका तो डिस्टिक कैडर है। उनका तबादला देहरादून कैसे हो सकता है। नौकरी के वक्त उन्होंने क्या लिखकर दिया था लेकिन इसके विपरीत मुख्यमंत्री की पत्नी जिनका तबादला प्राथमिक विद्यालय मैंदोली पौड़ी गढ़वाल से प्राथमिक विद्यालय प्राथमिक विद्यालय अजबपुर कला में कैसे हो गया था। जबकि वह भी तो डिस्टिक कैडर में ही नौकरी करती थी।
लोक सूचना अधिकारी से प्रवीण शर्मा पिन्नी के द्वारा मांगी गई सूचना के अधिकार में दी गई जानकारी तो यही बताती है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पत्नी का यह तबादला नियम विरूद्ध ही किया गया था। सूचना के अधिकार में दी गई जानकारी के अनुसार सुनीता की पहली नियुुक्ति प्रा0वि0कफल्डी, व दूसरे नियुक्ति प्रा0 वि0 मैन्दोली पौड़ी गढ़वाल में तथा तीसरी नियुक्ति प्रा0 वि0 अजबपुर कला देहरादून में हुई है। तथा वर्तमान में पदोन्नति के बाद उन्हें पूर्व माध्यमिक विद्यालय अजबपुर कला में तैनात किया गया है।

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