अतिक्रमण हटाने पर घर से बेघर हुए लोगों का झलका दर्द

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देहरादून। एक ओर सरकार अतिक्रमण हटाने के अभियान में जुटी हुई है तो वही दूसरी ओर घरों से बेघर होने जा रहे बेबस लोगों के ऊपर से छत छीने जाने पीड़ा की उन पर झलक रही है।
हाईकोर्ट ने बिना किसी की पीड़ा व दर्द को समझे अतिक्रमण हटानें का आदेश तो दे दिया लेकिन एक बार यह नही सोचा कि उन लोगों का क्या होगां जो पूरे दिन सड़को पर छोटी मोटी दुकान लगाकर मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर बसर करते है, यह नही सोचा कि अगर उन लोगों के उपर से छत उठ जाएंगी तो वह लोग कहां जाएंगे?बरसात का मौसम भी आ चुका है, बरसात कें मौसम में उनके पास कोई आसरा नही होगा तब वह क्या करेंगे? ऐसे हालातों में कौन उनकी मदद करेगा? और वह किस के पास जाएगें? क्योंकि यह आदेश तो हाईकोर्ट की ओर से जारी हुआ है। सड़कों पर बैठे हुए कुछ लोग तो ऐसे है जो अपनी छोटी मोटी दुकान से ही घर चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते है। अतिक्रमण के दौरान चिह्ति की गई जगहों के बाद सड़को पर बैठे लोगों की आखों में आंसू आ गए उन्हे चिंता सताने लगी कि ऐसे में अब वह कहां जाएगें। इनमें कुछ लोग सड़क के किनारे मोची व मिट्टी के घड़ो की दुकान लगाते है तो कुछ छोटी मोटी फड़ लगाकर अपने परिवार का गुजर बसर करते है। उनके मायूस भरें चेहरे व आंखो में आंसू देखकर लगता है कि अब उनसे उनका सब कुछ छिन रहा है। सड़को पर छोटी मोटी दुकान लगाकर बैठे लोगों का आरोप है कि नगर निगम से जमीन देने का केवल उनको आश्वासन ही मिला है, लेकिन जमीन अभी तक भी उपलब्ध नही हो सकी है। सभी चाहते है कि सरकार उनको यहां से बेशक हटा दें लेकिन उससे पहले उन सभी के रहने के लिए थोड़ी जमीन भी उपलब्ध कराकर दें ताकि उनको भी औरो की तरह रहने का आसरा उपलब्ध हो सके। वही सरकार है जिन्होंने 2016 में मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को पट्टा देने के लिए अधिनियम बनाया था उस पर भी कोई काम नही हो पाया। इसका हल तो अब केवल हाईकोर्ट में बेबस लोगों के हालातों को देखकर सरकार द्वारा याचिका दर्ज करके व 2016 का अधिनियम प्रधानमंत्री आवास योजना को सख्ती से लागू करके निकाला जा सकता है। जिससे उनके उजड़े घर फिर से रोशन हो सके।

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