रिश्तों की कोई गारंटी नहीं होती: मनीषा कोईराला

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राजसी परिवार में जन्म, अद्भुत कामयाबी, ब्रेकअप्स, तलाक, कैंसरजैसी जानलेवा बीमारी और फिर इस जानलेवा बीमारी से लड़कर एक फाइटर की तरह उबरना…मनीषा कोईराला ने अपनी जिंदगी में तमाम उतार-चढ़ाव देखे हैं। इन दिनों वे चर्चा में हैं अपनी फिल्म संजू को लेकर, जहां वे संजय दत्त की मां नरगिस दत्त की भूमिका में नजर आएंगी। इस मुलाकात में वे अपनी कामयाबी, डर, कैंसर से लड़ाई, तलाक, फिटनेस जैसे सभी मुद्दों पर दिल खोलकर बात कर रही हैं
हर रिश्ता आपको कुछ न कुछ सिखाता है। अपनी जिंदगी में ब्रेकअप्स और डिवॉर्स से क्या सीखा?
अभी मैं एक ऐसी स्ट्रॉन्ग औरत के साथ लंच करके आई हूं, जो रिश्तों के मामले में बदकिस्मत साबित हुईं। उन्हें जिंदगी में कई धोखे मिले। हमारे बीच जब रिश्तों और उन्हें टूटने की बात निकली, तो हम यही चर्चा कर रहे थे कि ऐसे समय में आपको अपने काम को अपनी रीढ़ की हड्डी बनाना चाहिए। देखिए औरतों को यह समझना होगा कि रिश्तों की कोई गारंटी नहीं होती। हो सकता है कि आपकी जिंदगी में कोई अच्छा इंसान आए या फिर न आए। अगर आपका काम मजबूत होगा, तो आप दुखी जरूर होंगे, मगर टूटकर बिखर नहीं जाएंगे। इस मामले में मैं यही कहूंगी कि अगर किसी ने मेरे सच्चेपन, मेरी खूबियों और प्यार को नहीं पहचाना, तो यह उसका नुकसान है, मेरा नहीं। मैं खुद को बेचारी क्यों समझूं!
आपके दौर में माना जाता था कि 4० के पार या शादी हो जाने के बाद हिरोइन का करियर खत्म हो जाता है। आज इंडस्ट्री में हिरोइनों की स्थिति कितनी बदली है?
अभी पूरी तरह से बदली नहीं है लेकिन बदल रही है। हमें अभी भी संभल कर रहना पड़ता है कि कहीं हम टिपिकल मां के किरदार में फिल्म में टाइपकास्ट न हो जाएं। मैं इन सभी चीजों से काफी घबराती हूं, क्योंकि ये सोच बन गई है कि जैसे ही आपकी शादी हो जाती है या 4० साल की उम्र पार करते हैं, आपको टिपिकल मां का किरदार दे दिया जाता है। मैं इस बात का ध्यान रखती हूं कि अगर मुझे किसी एक फिल्म में मां का किरदार निभाना है, जैसे संजू और वह फिल्म काफी बड़ी हो, तो में उस किरदार को जरूर करूंगी, मगर मैं टिपिकल मां का किरदार नहीं कर सकती।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से उबर कर आपने असल जिंदगी में भी खुद को फाइटर साबित किया। उस मुश्किल दौर में आपके लिए सबसे बड़ा सहारा क्या था?
मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मेरे पास एक ऐसा परिवार है, जो मेरा सबसे बड़ा आधार था। कैंसर की उस जानलेवा बीमारी में कई दौर ऐसे आए, जब मैं दिन-रात रोती थी। हिम्मत हार जाती थी। मुझे याद है कि एक बार तो मैं बहुत ज्यादा डिप्रेशन में थी। असल में कैंसर की बीमारी में मुझे एक दवा लेनी पड़ती थी, जिससे वाइट ब्लड सेल बनते हैं। उस समय मेरे प्लेटलेट काउंट्स बहुत कम हो गए थे और मैं बहुत ज्यादा कमजोर हो गई थी। कीमोथेरपी के कारण मुझे हड्डियों में बहुत दर्द हुआ करता था। एक बार दर्द इतना ज्यादा हुआ कि मैं टूट गई और मैंने अपनी मां से कहा कि मैं इस हालत में जिंदा नहीं रहना चाहती। मैं रोए जा रही थी और मां भी मेरे साथ रो रही थीं। वह रोते-रोते बोलीं, च्तुम्हें जिंदा रहना होगा हमारे लिए। खुद को संभालो। अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो हमें कौन देखेगा।ज् मां की इस बात ने मुझे बहुत हिम्मत दी। मैं जब न्यू यॉर्क में अपना कैंसर का ट्रीटमेंट करवा रही थी, तो मैंने देखा कि मेरे आस-पास लोग बहुत उदास, डिप्रेस और अकेले हैं। वह माहौल बहुत डरावना था। असल में वहां फैमिली सपॉर्ट सिस्टम ही नहीं होता। वहां लोग बहुत अकेले होते हैं। (आरएनएस)
जानी-मानी कोरियॉग्राफर सरोज खान ने आपके साथ कई सुपरहिट गानों पर काम किया है। पिछले दिनों उन्होंने इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच मुद्दे पर बवाल खड़ा कर दिया था। आप क्या कहेंगी?
हां, मैंने ये चीजें थोड़ी-बहुत देखी हैं। मुझे लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री हो या कोई और इंडस्ट्री, मासूमों का शोषण होता रहेगा, क्योंकि यह एक बुराई है, जो हमारे समाज में पसरी हुई है। लेकिन मुझे आपत्ति इस बात की है कि समाज में कुछ भी बुरा होता है, निशाना फिल्म उद्योग को बनाया जाता है। मुझे लगता है कि लड़कियों का शोषण हर जगह होता है। इस मामले में लड़कियों को और ज्यादा सतर्क होना पड़ेगा।
अब आप अपनी फिटनेस और खूबसूरती को कैसे बनाए रखती हैं?
मैं खुद को किसी न किसी रूप में ऐक्टिव रखती हूं। अभी हाल ही में मैं फ्लू से उबरी हूं और बहुत कमजोरी महसूस कर रही हूं, मगर मैंने इस बीच स्ट्रेचिंग की। आज ही मैंने सुबह पहली बार दिल खोलकर स्विमिंग की। मुझे पानी का फोबिया रहा है, तो मैं पानी में उतरती थी, मगर ज्यादा गहराई में नहीं जा पाती थी। आज सुबह पहली बार गहरे पानी में उतरी, जमकर स्विमिंग की। मुझे नई चीजें करना बहुत अच्छा लगता है। मैं योगा, स्ट्रेचेस, डांस, जिम, स्पोर्ट्स आदि करना पसंद करती हूं। जब भी नेपाल में जाती हूं, तो मुझे हाइकिंग बहुत पसंद है। एक बार तो मैंने 11 घंटे की चढ़ाई चढ़ी। मैं चढ़ते-चढ़ते भूल गई। बाद में कई दिनों तक मेरे पैर दुखते रहे।

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