अब आतंकियों के शव परिजन को नहीं दिए जाएंगे

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नई दिल्ली। आतंकी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए सेना ने लगातार ऑपरेशन जारी रखे हुए है एक सख्ती के चलते अब मारे गए आंतकियों के शवों को उनके परिवारजनों को न देते हुए अब अनजान जगह दफन किया जायेगा।सेना के अधिकारी के अनुसार कश्मीर घाटी में लश्कर, जैश हिज्बुल के टॉप कमांडर के मारे जाने पर उनके शव को उनके परिवार को नहीं सौपा जाएगा। बल्कि ऑपरेशन के दौरान ढेर किये जाने के बाद आतंकियों को अनजान जगह पर दफन करने पर विचार हो रहा है। वर्ष २०१८ में विभिन्न आतंकी संगठनों ने ८० युवाओं को अपने साथ शामिल किया है। वही २०१७ में ये आँकड़ा १२६ था। २०१० में ५४, २०११ में २३, २०१२ में २१, २०१३ में ६ युवको ने आतंक का हाथ थामा। २०१४ में यह संख्या ५३ हुई, वही २०१५ में इजाफे के साथ यह बढ़कर ६६ पहुंच गई थी।

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