आध्यात्म की आत्मा का महाप्रयाण

0
22

देहरादून। राजधानी दून के मच्छी बाजार स्थित श्री कालिका माता मंदिर के संस्थापक व आस्था के स्तम्भ बालयोगी सर्वदास जी महाराज ने आज अपना शरीर त्याग दिया।
बालयोगी सर्वदास जी महाराज के शरीर छोड़ने का समाचार जैसे ही नगरवासियों को मिला तो शोक की लहर दौड़ गई और महाराज जी के सानिध्य में रहने वाले लोगों की भीड़ मंदिर की ओर उमड़ पड़ी। लोगों के आस्था और विश्वास के प्रतीक रहे महाराज जी के अंतिम दर्शनों के लिए उमड़े जनसैलाब को देख प्रशासन को भी व्यवस्थाएं बनाने में भारी मसक्कत करनी पड़ी। सर्वप्रिय और सर्वश्रद्धा के आलम्ब रहे महाराज जी के महाप्रयाण पर उनके सानिध्य में रहे भक्त और श्रद्धालुओं को ऐसा लगा जैसे उनका सब कुछ चला गया हो।
पूजनीय श्री बालयोगी सर्वदास जी महाराज ने अपना पूरा जीवन श्री कालिका माता मंदिर की सेवा में समर्पित रखा था। पिछले लगभग 59 वर्षों से आध्यात्म विद्या के धनी महाराज जी निरंतर जनकल्याण और मंदिर की सेवा में विरत रहे। नगर के जनसामान्य से लेकर विशिष्ट व्यक्तियों तक की श्रद्धा के केन्द्र रहे महाराज जी के महा प्रयाण की खबर जिसने भी सुनी सभी शोक में डूब गए। दरबार साहिब के महंत श्री देवेन्द्र दास जी महाराज से लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तक उनके महाप्रयाण की खबर सुनते ही उनके अंतिम दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे और उन्हें श्रद्धा सुमन समर्पित किए।
जानकारी के अनुसार 11 मई 1954 में यहां उन्होंने एक छोटे से मंदिर का निर्माण कर मां भगवती की ज्योति प्रज्ज्वलित की थी। जो आज अद्यावधि तक इस मंदिर में अखण्ड ज्योति के रूप में विद्यमान है। मां की कृपा तथा महाराज जी के सतत प्रयास और संघर्षों से आज यहां एक सुंदर विशाल भवन और अट्टालिकाएं हैं। महामना बालयोगी श्री सर्वदास जी महाराज के संरक्षण में इस मंदिर का कार्यभार 5 व्यक्तियों की समिति द्वारा देखा जाता है। प्रत्येक मंगलवार और वृहस्पतिवार को यहां मां की चौकी आयोजन होता है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। यहां प्रतिवर्ष चैत्रमास नवरात्र में महाशक्ति सम्मेलन एवं ध्वजारोहण महोत्सव का आयोजन किया जाता है। बालयोगी सर्वदास जी महाराज के पूर्ण प्रताप के कारण भवन श्री कालिका माता में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास है। लोगों का मानना है कि माता के दरबार में सब की मुरादें पूरी होती हैं। महाराज जी के कल तक अंतिम दर्शन किए जा सकेंगे। समाचार लिखे जाने तक मंदिर प्रांगण में महाराज जी के अंतिम दर्शनों का सिलसिला जारी था।

LEAVE A REPLY