नैनीताल में पर्यटकों की नो एंट्री

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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य को बने हुए 18 साल होने जा रहे हैं। राज्य को पर्यटन प्रदेश बनाने का सपना देखने वाले राज्य के नेताओं के सामने आज भी यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि क्या वह ऐसे ही कपोल कल्पनाओं में प्रदेश को पर्यटन प्रदेश बना सकेंगे। बीते दो दिनों से नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल पर उमड़ रही शैलानियों की भीड़ को संभालना स्थानीय प्रशासन के लिए मुश्किल हो गया है और अब वहां पर्यटकों के लिए नो एंट्री हो गई है। बिना होटल की बुकिंग पर्ची के पर्यटकों को नैनीताल जाने से रोका जा रहा है।
एक तरफ यहां अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा नित नए प्रयोग किए जाते हैं। वहीं फिलहाल स्थिति यह है कि अब इन पर्यटकों को यहां आने से रोकने की नौबत आ गई है। कारण है कि इन पर्यटक स्थलों पर होटलों का फुल होना तथा पार्किंग के लिए भी स्थान न होना।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल में पर्यटकों को एडवांस होटल की बुिंकंग की पर्ची दिखाए बिना एंट्री नहीं दी जा रही है। जिसकी वजह से सैकड़ों पर्यटकों को वापस लौटना पड़ रहा है। स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि पर्यटकों के लिए अपनी गाडि़यों को पार्क करने के लिए स्थान नहीं मिल पा रहा है। कई पर्यटक तो अपने वाहनों में ही सो जाने को भी तैयार हैं लेकिन फिरभी उन्हें नैनीताल में प्रवेश से रोका जा रहा है। यह हालत सिर्फ नैनीताल की नही है। देश विदेश के पर्यटकों का आकर्षण रही मसूरी का भी हाल इन दिनों कुछ ऐसा ही है। मसूरी में भले ही इन पर्यटकों को रहने के लिए होटल में जगह मिल जाए और मसूरी में जगह न मिलने पर यह पर्यटक देहरादून आकर किसी होटल में ठहर सकें, लेकिन मसूरी में आने वाले पर्यटक अपनी गाड़ी कहां पार्क करें इसे लेकर उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि दो-दो तीन-तीन किमी लम्बी वाहनों की लाइने लग जाने से यह पर्यटक कई कई घंटे जाम में फंसकर कसमसाते रहते हैं।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज कभी

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