दुर्घटनाओं पर डीएम ने नेशनल हाईवे अथारिटी को दी मुकदमें की धमकी!

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देहरादून। सात सालों से चले आ रहे मुजफ्फर नगर से हरिद्वार तक 80 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे के चौडीकरण में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया,एनएचएआई) की लापरवाही सेे लोगों की जान पर भारी पडते देख जिलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत ने एनएचएआई की लापरवाही को असहनीय और सामान्य जन के जीवन पर भारी बताते हुए अथारिटी के अफसरों को विधिवत पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि वे दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले खतरनाक स्थानों पर चेतावनी की सूचनायें नही लगाते तो प्राधिकरण पर लापरवाही से नागरिकों की मृत्यु का कारण बनने में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए में मुकदमा दायर किया जायेगा ।

जिलाधिकारी की चेतावनी को एनएचएआई के उत्तराखंड प्रकल्प निदेशक पीएस गुसाईं ने भी गंभीरता से लिया है और इसका संदर्भ देते हुए एनएचएआई निदेशक आलोक खन्ना को पत्र लिखा है कि हालांकि निर्माण एजेंसियों ने चौडीकरण स्थलों में स्थान-स्थान पर संकेतक लगाये जरूर हैं लेकिन कई ऐसे स्थल भी पाये गये हैं जहां संकेतक होने चाहिये लेकिन हैं नही । इससे प्राधिकरण की बदनामी हो रही है।

असल में जिलाधिकारी रावत के पाया कि पिछले सात साल में इस चौडीकरण से यातायात में आ रही कठिनाईयों के अलावा मुजफ्फर नगर से हरिद्वार की बीच दुर्घटनाओं में 700 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इस आंकडे से चौके जिलाधिकारी ने तत्काल इस बारे में अथारिटी को उचित कदम उठाने और उनमें भी खतरनाक स्थानों पर चेतावनी सूचक पट्ट लगाने को कहा ।

मुजफ्फर नगर से हरिद्वार तक 80 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे का चौडीकरण अथारिटी केे नई दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग चौडीकरण की महत्वाकांक्षी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन यह काम घोघे की चाल से ही चल रहा है । इससे इस प्रकल्प की संशोधित लागत 16 अरब रूपये हो चुकी है। इसे पूरा करने की पूर्व निर्धारित समयावधि इस साल नवंबर में समाप्त हो रही है।

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