जीएसटी की उलझन

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अतुल कनक
‘ज़माना जीएसटी का है साहब।’ श्रीमान जी बोल रहे थे। मैंने पूछ लिया,’श्रीमान जी आपकी बात मान लेता हूं। लेकिन मैं जऱा कम अक्ल हूं। जीएसटी के बारे में ज्यादा नहीं जानता। क्या आप मुझे जीएसटी का अर्थ समझाएंगे’ श्रीमान जी ने मेरी बात सुनकर कुछ ऐसी निगाहों से देखा मानो मैंने उनसे जीएसटी का अर्थ नहीं पूछा हो, उनके एटीएम का पासवर्ड पूछ लिया हो।

श्रीमान जी ने इधर-उधर दयनीय भाव से देखा। मैं समझ गया कि उन्हें अपनी बात शुरू करने का सूत्र नहीं मिल रहा है। श्रीमान जी ने बोलना शुरू किया,’देखो कवि महोदय, जीएसटी जो है वह तुम्हारे लिये किसी तेज गेंदबाज की गेंद है जो तुम्हारी समझ में नहीं आ सकती। यह मान लो कि जीएसटी एक जलेबी है। अब तुम्हें जलेबी का स्वाद लेने से मतलब है या इस बात से कि उसे कितनी देर तक गर्म तेल में सेंका गया जीएसटी जो है वह जीएसटी है। उसके अनेक फायदे हैं। लोगों को शुरू शुरू में इसके बारे में बहुत सी गलतफहमियां रहेंगी लेकिन एक बार जब आदत पड़ जाएगी तो वो फिर इसका आनंद लेना शुरू कर देंगे।’ मैंने बीच में बोलने की हिम्मत कर ली—’श्रीमान जी, हम जीएसटी के बारे में बात कर रहे हैं न’

ज्तो हम तुम्हें बताना चाहते हैं कि जिस तरह ग्रीन-टी भले ही थोड़ी जेब ढीली कर देती हो लेकिन वो हमारे स्वास्थ्य के लिये बहुत अच्छी होती है। ठीक यही बात जीएसटी के साथ समझ लो।’ मैं चौंका—’इसका मतलब यह हुआ कि जीएसटी हमारी जेब ढीली करेगा’ लेकिन इस बार श्रीमान जी ने मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दिया। अपने ही मूड में बोलते चले गये—’जीएसटी के पहले तक कई टैक्स खलनायक की तरह हमारी जिन्दगी में बने हुए थे।

अब जीएसटी पर्दे पर आ गया है तो यह मान लो कि सुनील शेट्टी जैसा नायक सामने आ गया है। अब नायक सामने हो तो खलनायकों का दुम दबाकर भागना बिल्कुल तय है।’ श्रीमान जी के तर्क से मैं असहमत था। यदि अब तक के टैक्स खलनायक थे तो सरकार उन्हें क्यों चला रही थी। खलनायक तो जनता को लूटते हैं तो क्या अब तक सरकारी संरक्षण में जनता से लूट हो रही थी।’ वो बोलते रहे—’जीएसटी जो होता है वह जीएसटी होता है क्योंकि उसमें जी, एस और टी-तीन अक्षर होते हैं।

तुम तो जानते हो कि हमारी संस्कृति में तीन के अंक का कितना महत्व है। त्रिदेव ने मिलकर त्रिलोक की रचना की है। जी हिन्दी में हो या अंग्रेजी में, बहुत महत्वपूर्ण अक्षर होता है। हिन्दी का जी हो तो यह हमारे मन का परिचायक होता है और अंग्रेजी का जी हो तो यह गॉड अर्थात भगवान को निरूपित करने वाले शब्द को पहला अक्षर बन जाता है। इसलिये जीएसटी का होना बहुत महत्वपूर्ण है।’

मैंने श्रीमान जी से पूछा— ‘लेकिन यह तो बताओ कि जीएसटी क्या हैÓ लेकिन वो यह कहते हुए आगे बढ़ गये कि सारा ज्ञान हम ही दे देंगे तो आप कवि किस बात के लिये बने हो महाशय।

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