खूब चंगा है पार्किंग का धंधा

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पार्किगं का अभाव, यातायात व्यवस्था पर भारी

मंहगी पार्किगं से बचने को सड़कों पर पार्किंग

16 साल में भी नहीं बनी सरकारी पार्किंग व्यवस्था

संवाददाता
देहरादून। राजधानी दून की यातायात व्यवस्था की बदहाली का सबसे अहम कारण पार्किंग व्यवस्था का अभाव है। राजधानी में सरकारी पार्किंग कोई व्यवस्था है नहीं और निजी पार्किंग में मनमानी वसूली के कारण लोग इसका इस्तेमाल करने से कतराते है। नतीजन सड़कों के दोनो तरफ लोगों द्वारा वाहन पार्क कर दिये जाते है जिससे यातायात बाधित होता है और सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है।

भले ही राजधानी बनने के 16 सालों में दून की प्रमुख सड़कों व बाजारों में बहुमंजिला इमारतों और माल की भरमार हो गयी हो लेकिन नगर निगम व सरकारों द्वारा शहर की पार्किंग की समस्या पर कभी गौर न किये जाने से अब सड़कों पर चल पाना भी भारी मुश्किल हो गया है दून वासी अब हर दिन यातायात व्यवस्था के झाम व जाम को झेलने पर विवश है। सरकार भले ही वाहनों के चालानों से मोटी कमाई पर खुश हो लेकिन चालानों की बजाय अगर पार्किंग व्यवस्था दुरस्त करने पर ध्यान दिया जाता तो आज यातायात तो सुचारू होता ही सरकार को चालानों से ज्यादा आय भी हो रही होती।

दून के नगर क्षेत्र में बने तमाम माल और शापिंग काम्पलेक्सों में जो पार्किंग है वह उनकी कमाई का धंधा बन गये है इन निजी पार्किंगों में कार पार्किंग का चार्ज 30-40 व 50 रूपये तक वसूला जा रहा है। बात चाहे राजपुर रोड पर बने सिल्वर सिटी व पैसिफिक जैसे माल की हो या फिर क्रास रोड माल की हर जगह वाहन पार्क करने वालों से घंटो के हिसाब से पार्किंग का चार्ज वसूला जाता है। घंटाघर स्थित एचएन बहुगुणा कामर्शियल काम्पलेेक्स में घंटो के हिसाब से पार्किंग वसूली जाती है।

पार्किंग का यह चार्ज इतना ज्यादा है कि हर एक वाहन चालक इन पार्किंग में वाहन पार्क करने से बचता है और उसकी यही कोशिश होती है कि सड़क किनारे आयें-बायें-दायें ही वाहन पार्क कर अपना काम चला लिया जाये। क्यों बेकार 40-50 रूपये खर्च किये जायें इसी प्रवृत्ति के कारण हर एक सड़क पर दोनों तरफ बेतरतीब वाहन पार्क कर दिये जाते है जो यातायात व्यवस्था को चैपट कर देते है और जाम का कारण बन जाते है।

राजधानी में इस समय ढाई लाख से अधिक निजी वाहन है जो नियमित सड़कों पर निकलते है वहीं पर्यटन सीजन में हर रोज एक से डेढ़ लाख वाहन बाहरी राज्यों से आते है एक तरफ वाहनों का बढ़ता दबाव व दूसरी ओर पार्किंग की व्यवस्था शुन्य, राजधानी के यातायात व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। भले ही दून स्मार्ट सिटी बनने जा रहा हो लेकिन अगर व्यवस्था ऐसी ही रही तो वह दिन दूर नहीं जब दून का हाल दिल्ली से भी बदतर हो जायेगा।

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